ईरान के बयान पर अमेरिका की तीखी प्रतिक्रिया

ओबामा ने बीबीसी पर्सियन टीवी के साथ बातचीत में कहा, "यह आक्रामक था। यह घृणित था, और वह भी खासतौर से ऐसे जगह पर इस तरह का बयान देना, जो कि ग्राउंड जीरो के उत्तर में थोड़ी ही दूरी पर स्थित है, जहां के लोगों ने अपने प्रियजनों को उस हमले में खोया है।" ओबामा का यह बयान शुक्रवार को भारतीय समयानुसार अपराह्न् दो बजे प्रसारित हुआ।
ओबामा ने कहा, "सभी धर्मो, सभी जाति के जिन लोगों ने इस हमले को मौजूदा पीढ़ी की पहली त्रासदी के रूप में देखा हो, उनके लिए इस तरह का कोई बयान अक्षम्य है।" ईरानी के राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन में कहा था कि 9/11 के हमले के पीछे अमेरिका अपनी लड़खड़ाती अमेरिकी अर्थव्यवस्था को संभालने और मध्यपूर्व पर अपनी पकड़ तेज करने के साथ इजरायल को बचाने के लिए इस हमले की साजिश रची।
अहमदीनेजाद के इस बयान के बाद कम से कम 33 देशों के प्रतिनिधि सभा कक्ष से उठ कर चले गए। इनमें अमेरिका, कनाडा, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, कोस्टा रिका, यूरोपीय संघ के सभी 27 सदस्य देश और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधि शामिल थे। अहमदीनेजाद के इस बयान के बाद संयुक्त राष्ट्र के अमेरिकी मिशन ने तत्काल बयान जारी कर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
बयान में कहा गया है, "ईरानी जनता की आकांक्षाओं और सद्भावनाओं को प्रस्तुत करने की बजाए अहमदीनेजाद ने एक बार फिर घृणित साजिश की कहानियों और यहूदी विरोधी जज्बातों को हवा दी है जो घिनौनी और भ्रामक हैं।"
अहमदीनेजाद ने कहा कि आतंकियों ने अमेरिकी सुरक्षा को भेदा तो उसके लिए वहां की सुरक्षा जिम्मेदार थी। उन्होंने कहा कि आतंकियों ने हमला जरूर किया, लेकिन अमेरिकी सरकार ने उस स्थिति का लाभ उठाया। अहमदीनेजाद ने यह सुझाव तक दे डाला कि सच्चाई का पता लगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र एक तथ्यान्वेषी समिति गठित करे।
उधर, यूरोपीय संघ ने गुरुवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के 'अनुचित' और अस्वीकार्य' दावों की वजह से उसके 27 सदस्यों ने उनके भाषण का बहिष्कार किया।
समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार यूरोपीय संघ की विदेशी मामलों की वरिष्ठ प्रतिनिधि कैथरीन एश्टन ने एक बयान जारी कर कहा कि अहमदीनेजाद का वक्तव्य अनुचित और अस्वीकार्य था। यही वजह है कि यूरोपीय संघ के सभी 27 देशों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा हॉल से वॉक आउट किया।
एश्टन ने 9/11 के हमलों में मारे गए लोगों के परिजनों और मित्रों के प्रति संवेदना व्यक्त की। इन हमलों में 2700 से ज्यादा लोग मारे गए थे।
अहमदीनेजाद ने कहा कि इराक और अफगानिस्तान में अमेरिकी नेतृत्व में हुए अभियानों में मारे गए हजारों लोगों के सामने यह आंकड़ा नगण्य है।












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