बिहार, यूपी में नदियों के जलस्तर में कमी

बिहार में गोपालगंज के जिलाधिकारी बाला मुरुगन ने कहा कि कई गांवों के लोग अब अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं। बिहार में सबसे खराब स्थिति गंडक नदी के तटबंध के मुहाने पर बसे सेमरिया गांव की है, जहां कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
बिहार में बाढ़ से करीब 500 गांवों की पांच लाख से अधिक आबादी प्रभावित हुई है। उत्तरप्रदेश में रामगंगा, मालन, कोसी और गंगा नदी के उफान पर आने से बिजनौर, अमरोहा, शाहजहांपुर, बरेली, रामपुर, बुलंदशहर, सहारनपुर, बदायूं और फरुखाबाद जिलों के निचले इलाकों में 500 से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया था।
पिछले दो-तीन दिनों से उत्तराखण्ड के बांधों से बड़ी मात्रा में पानी नहीं छोड़ा गया है जिससे गंगा, रामगंगा जैसी नदियों के जलस्तर में कमी आने से हालात में सुधार हो रहा है। प्रभावित इलाकों में युद्धस्तर पर राहत कार्य जारी है।
उन्होंने बताया कि रामगंगा में तेज बहाव से टूटे हरेवली बांध पर मरम्मत का काम चल रहा है। इस बांध के टूटने से दिल्ली-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग-74 पानी में डूबा हुआ है।
मुरादाबाद में हालात में पहले से थोड़ा सुधार आया है। जिन रिहायशी इलाकों में तीन से चार फुट तक पानी भर गया था, वहां कोसी के जलस्तर में गिरावट आने से पानी का स्तर अब कम हो रहा है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में 12 जिले अब भी बाढ़ की चपेट में हैं। यहां बाढ़ अब तक से 86 मौतें हुई हैं। इस बीच, उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखण्ड में बाढ़ की चपेट में आए लाखों लोगों की मदद के लिए यूनिसेफ राहत सामग्री भेज रहा है।
केंद्र सरकार ने भी प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री भेजी है और राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल (एनडीआरएफ) की टीमों को उत्तराखण्ड के हरिद्वार, ऋषिकेश तथा बिहार के गोपालगंज जिले में तैनात किया गया है।
दूसरी ओर हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से तीन लाख 30 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण शनिवार को यमुना का जल स्तर एक बार फिर बढ़ने की आशंका है।












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