भारत ने निरस्त्रीकरण के प्रयास का समर्थन किया
निरस्त्रीकरण सम्मेलन में किए गए प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए भारतीय विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा ने शुक्रवार को एक उच्च स्तरीय बैठक में कहा, "भारत अब भी पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा 1988 में प्रस्तुत की गई परमाणु हथियारों से मुक्त और हिंसा से रहित विश्व की कार्ययोजना के प्रति प्रतिबद्ध है।"
उन्होंने कहा, "यह दुखद वास्तविकता है कि यह लक्ष्य अब भी दूर बना हुआ है। निरस्त्रीकरण सम्मेलन में वार्ता के दौरान इस मामले में लगातार विरोध के चलते यह स्थिति बनी हुई है।"
यह बैठक संयुक्त राष्ट्र महासभा की वार्षिक बैठक के दौरान आयोजित की गई। इस बैठक में बहुपक्षीय निरस्त्रीकरण वार्ता के संबंध में भी विचार किया गया।
कृष्णा ने कहा कि निरस्त्रीकरण सम्मेलन में मई 2009 में आपसी सहमति से विखंडनीय पदार्थो में कमी लाने की संधि (एफएमसीटी) पर वार्ता शुरू करने का निर्णय लिया गया था।
उन्होंने कहा कि भारत ने इस तरह की वार्ता का समर्थन किया है, खासकर परमाणु निरस्त्रीकरण के मुद्दे को भारत ने वरीयता सूची में रखा है।
निरस्त्रीकरण सम्मेलन को बहुपक्षीय संधियों पर वार्ताओं से रोके जाने पर निराशा जताते हुए कृष्णा ने इस सम्मेलन को भारत के समर्थन की बात दोहराई।
भारत ने एफएमसीटी संधि पर वार्ता की शुरुआत का भी समर्थन किया है।
बान ने सदस्य देशों से विश्व को सामूहिक विनाश के हथियारों से मुक्त करने के लिए इस क्षेत्र में हाल ही में लिए गए संकल्पों के अनुरूप कदम उठाने की अपील की।
उन्होंने कहा, "हमारा विश्वास है कि यदि सदस्य देशों में राजनीतिक इच्छा शक्ति मौजूद हो तो बहुपक्षीय निरस्त्रीकरण की कार्यवाही ज्यादा तेजी से हो सकती है ।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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