बाढ़ से बर्बाद हुआ पश्चिमी उत्तर प्रदेश

मुजफ्फरनगर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आयी बाढ़ ने ऐसी विनाशलीला मचायी है कि अब बाढ़ से उबरने और स्थिति संभलने का विचार तक बेमानी होता जा रहा है। फसल हो या इंसान हर कोई बाढ़ के दंश से आहत है।

सेना सहित जिला एवं राज्य प्रशासन नागरिकों के साथ मिल कर काम कर रहा है। लेकिन बाढ़ से अब तक राज्य के पश्चिमी हिस्से की लगभग पांच लाख हेक्टेयर से अधिक फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है और लगभग 11000 मकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। कई जिलों में राहत एवं बचाव कार्य में मदद के लिए सेना को बुलाया गया है।

राज्य में बाढ़ से सबसे अधिक 12 जिले प्रभावित हुए हैं जिनमें प्रमुख रूप से मुरादाबाद, बिजनौर, रामपुर, फरुर्खाबाद, हरदोई, शाहजहांपुर, मुजफ्फरनगर, लखीमपुर खीरी शामिल है। इन जिलों में बाढ़ से अब तक 87 लोग मर चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग ने भी 10 जिलों में अलर्ट जारी कर दिया है और इनमें मोबाइल टीमें गठित की गई हैं।

बाढ़ के कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश रोडवेज की 1000 बसों की आवाजाही रोक दी गई है। अब तक 150 से अधिक मवेशियों की जानें जा चुकी हैं। प्रभावित लोगों के पास सरकारी मदद भी नहीं पहुंच पा रही है। राज्य के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में अब तक 630 गांव पानी में डूब चुके हैं। राहत एवं बचाव कार्य में 3,500 नावें लगाई गई हैं। राज्य की 94 तहसीलें सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं। बाढ़ से इन जिलों में 78 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

मुजफ्फरनगर के जिलाधिकारी संतोष यादव ने कहा, "बाढ़ के कारण प्रभावित इलाकों में टूटी सड़कों की मरम्मत के लिए 25 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया गया है लेकिन मुख्यमंत्री के दौरे के बाद ही इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।" उन्होंने कहा कि प्रस्तावित राशि की मदद से लोगों के पुनर्वास के साथ ही भोजन, चिकित्सा व्यवस्था मुहैया कराई जाएगी। इसके अलावा संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए भी योजना बनाई गई है।

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