कपड़ों में मेरे बेटे की कल्पना की झलक : रितु कुमार

रितु कुमार ने आईएएनएस को बताया, "इस फैशन शो में मेरे बेटे द्वारा डिजाइन किए कपड़े रखे गए। मुझे नहीं पता कि बचपन में उसने कब रंगों और कपड़ों की भाषा विकसित कर ली। उसकी समझ देखकर मुझे हैरानी होती है।"

फैशन डिजाइनर ने पहली बार बेटे अमरीश के सहयोग से शाम के वक्त पहने जाने वाले कपड़ों का प्रदर्शन किया। इन कपड़ों की डिजाइन सुहावने शाम के अनुभव, तारों की टिमटिमाहट और मोगरा की खूशबू को उभारने के लिए की गई है।

इन आधुनिक कपड़ों पर वर्ष 1930 के पुराने कपड़ों की झलक मिलती है। शाम के वक्त पहने जाने वाले कपड़ों को नए और पारंपरिक भारतीय कपड़ों के मिश्रण से तैयार किया गया है। इन्हें पहनने से गुजरे जमाने का सौंदर्य ताजा हो जाता है।

अपने बेटे के काम के बार में रितु ने कहा, "अमरीश की सबसे बड़ी खासियत शायद यह है कि वह कपड़ों की समझ रखता है। लेकिन वह इसे अपने तरीके से आधुनिक रूप देता है। उसका काम मेरी तरह से सामान्य है। वह उस तरह का डिजाइनर नहीं है जो शादी के लिए लहंगा बनाता है। वह साधारण कपड़े तैयार करता है, जिनमें खासियत होती है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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