अफ़ग़ानिस्तान में संसदीय चुनाव

अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका के विशेष दूत रिचर्ड हॉलब्रुक का कहना है कि इन चुनावों में बहुत सी कमियाँ होंगी लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि ये चुनाव संपन्न हो रहे हैं.राष्ट्रपति करज़ई पर इन चुनावों को लेकर बड़ा कूटनीतिक दबाव है क्योंकि पिछले साल राष्ट्रपति पद के चुनाव में धाँधली को उन्होंने स्वीकार कर लिया था लेकिन उनके प्रतिद्वंद्वी अब्दुल्लाह-अब्दुल्लाह ने यह कहकर पुनर्मतदान से अपने आपको अलग कर लिया कि निष्पक्ष मतदान हो ही नहीं सकते.
अमरीका इन चुनावों पर नज़र लगाए हुए है क्योंकि अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा इन दिसंबर में अफ़ग़ानिस्तान में अपनी युद्धनीति पर पुनर्विचार करने वाले हैं. माना जा रहा है कि वे अगले साल से सेना की वापसी की योजना पर विचार करेंगे.इन चुनावों के ठीक एक दिन पहले दो उम्मीदवारों सहित 18 चुनाव कर्मचारियों और प्रचारकों का अपहरण कर लिया गया.
शनिवार के चुनावों के लिए सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं.पूरे देश में 2,80, 000 सैनिकों और पुलिस बल को तैनात किया गया है.34 प्रांतों में कोई 6000 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं लेकिन माना जा रहा है कि इनमें से एक हज़ार केंद्र तो सुरक्षा कारणों से खुलेंगे ही नहीं.
मतदान भारतीय समयानुसार आठ बजे शुरु होगा और शाम पाँच बजे ख़त्म होगा.पूरे अफ़ग़ानिस्तान में कोई एक करोड़ मतदाता दर्ज हैं लेकिन संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि यदि 50 से 70 लाख लोग भी बाहर निकलकर वोट डालते हैं तो अच्छा है.अफ़ग़ान पुलिस और सेना मतदान केंद्रों की देखभाल करेंगे और विदेशी सेना उनकी देखभाल करेगी.












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