शास्त्रीय गायक गवई के सम्मान में शोक

गवई की अंत्येष्टि शनिवार शाम बेंगलुरू से 480 किलोमीटर दूर गादग में की जाएगी। गरीब परिवारों के हजारों बच्चों को संगीत की शिक्षा देने वाले ग्वालियर घराने के प्रतिनिधि गायक गवई का गादग स्थित उनके वीरेश्वरा पुण्याश्रम परिसर में निधन हो गया। वह 96 साल के थे और कुछ समय से बीमार चल रहे थे।

उनके सम्मान में गादग के विद्यालयों व कॉलेजों और हावेरी एवं धारवाड़ जिलों को बंद रखा गया है। सामाजिक कार्यो और खासतौर पर दृष्टिहीनों के लिए किए गए कार्यो की वजह से गवई को कर्नाटक में 'साक्षात ईश्वर' और 'दृष्टिहीनों की रोशनी' कहा जाता है।

उनके निधन का समाचार मिलने पर कर्नाटक भर से सैकड़ों लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे।

गौरतलब है कि गवई जब छह महीने के थे तभी वह करीब-करीब दृष्टिहीन हो गए थे, लेकिन उन्होंने इस कमजोरी पर विजय पाई और कन्नड़, हिंदी व संस्कृत भाषा के विद्वान के रूप में उभरे। कर्नाटक संगीत को बुलंदियों पर पहुंचाने वाले गवई वायलिन, सारंगी, तबला और वीणा बजाने में भी उस्ताद थे।

मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा और उनके मंत्रियों सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने गवई को श्रद्धांजलि दी है।

इंडो-एशिया न्यूज सर्विस।

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