मेजर की विधवा को 80 रुपये की पेंशन मिलना दुखद : अदालत
न्यायमूर्ति मार्कण्डेय कात्जू एवं न्यायमूर्ति टी.एस. ठाकुर की खंडपीठ ने केंद्र सरकार और थल सेना प्रमुख को नोटिस जारी करते हुए कहा, "आज के समय में आप 80 रुपये में एक किलो दाल भी नहीं खरीद सकते।"
इससे पहले कि विधवा के वकील बी.बी. त्रिखा अपना मामला पेश करते, न्यायमूर्ति कात्जू ने अपना रोष प्रकट करते हुए कहा, "यह सब क्या हो रहा है?"
याचिकाकर्ता पुष्पा वांटी मेजर धरम चंद की विधवा हैं। धरम चंद 1937 में ब्रिटिश भारतीय सेना में भर्ती हुए थे और 1946 में उन्हें पदोन्नत कर जूनियर कमिशंड आफिसर बनाया गया था।
अदालत को बताया गया कि मेजर धरम चंद ने द्वितीय विश्वयुद्ध तथा 1962 व 1965 में चीन एवं पाकिस्तान के विरुद्ध युद्ध लड़ा था। पहली मार्च, 1967 में उनके निधन के बाद से उनकी विधवा पुष्पा को पारिवारिक पेंशन के तौर पर महज 80 रुपये दिए जा रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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