नेपाल में प्रधानमंत्री पद की दौड़ से हटे प्रचंड पर संकट बरकरार (राउंडअप)
काठमांडू, 17 सितम्बर (आईएएनएस)। नेपाल में विपक्षी माओवादी पार्टी के प्रमुख पुष्प कमल दहाल प्रचंड के प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी से नाम वापस लिए जाने के बावजूद यहां अगले प्रधानमंत्री के चुनाव का मामला सुलझता नहीं दिख रहा है।
दरअसल, प्रधानमंत्री पद के चुनाव में सात बार विफलता हाथ लगने के बाद विपक्षी माओवादी पार्टी ने शुक्रवार को कहा कि वह 26 सितंबर को प्रस्तावित आठवें दौर के चुनाव से पार्टी प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल प्रचंड की उम्मीदवारी वापस ले रही है। साथ ही पार्टी ने कहा कि वे सांसद आठवें दौर के चुनाव में भाग नहीं लेंगे। ऐसे में किसी दूसरे उम्मीदवार के चुने जाने की संभावना खत्म हो जाती है।
माओवादी पार्टी के उप प्रमुख एवं सांसद नारायण काजी श्रेष्ठ ने आईएएनएस को बताया, "प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-युनीफाइड मार्क्सिस्ट लेनिनिस्ट (यूएमएल) के साथ आज (शुक्रवार) सुबह हुई बैठक के बाद हम इस निर्णय पर पहुंचे हैं।"
प्रचंड और पार्टी के अन्य नेताओं के साथ श्रेष्ठ भी इस बैठक में उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि यह खेद का विषय है कि पार्टियां सात चक्र के चुनाव के बाद भी एक प्रधानमंत्री नहीं चुन पाईं हैं।
श्रेष्ठ ने कहा, "आज की बैठक में सभी नेताओं ने तय किया कि राष्ट्रीय सहमति के आधार पर एक नई सरकार गठित करने की कोशिश की जाए या फिर निर्वाचन प्रक्रिया में बदलाव करने की बात की जाए।"
श्रेष्ठ ने कहा कि आगामी 26 सितम्बर को होने वाले आठवें दौर के चुनाव में न तो माओवादी हिस्सा लेंगे और न ही मार्क्सवादी।
चूंकि आठवें दौर के चुनाव में तीन बड़ी राजनीतिक पार्टियों में से दो चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगी, लिहाजा इससे साफ हो गया है कि प्रधानमंत्री पद के दूसरे उम्मीदवार नेपाली कांग्रेस के राम चंद्र पौडियाल भी चुनाव जीत पाने की स्थिति में नहीं होंगे।
नेपाल में प्रधानमंत्री पद की दौड़ पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल द्वारा गत 30 जून को इस्तीफा दिए जाने के साथ शुरू हुई है। लेकिन इस पद के लिए पिछले दो महीने से जारी चुनाव का सातवां चक्र समाप्त हो चुका है, फिर भी प्रधानमंत्री का निर्वाचन नहीं हो पाया है।
नेपाल के अंतरिम संविधान के अनुसार नए प्रधानमंत्री का चुनाव संसद में मतदान के जरिए होना है। चुनाव जीतने के लिए किसी उम्मीदवार को 601 सदस्यीय सदन में सामान्य बहुमत की जरूरत है। जब तक कोई उम्मीदवार सामान्य बहुमत नहीं जुटा पाता, तब तक निर्वाचन प्रक्रिया जारी रहेगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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