'अदालत के बाहर अयोध्या मसले का समाधन नहीं' (लीड-1)

अदालत ने सिर्फ इस याचिका को खारिज ही नहीं किया, बल्कि याची पर दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगा दिया। यद्यपि सूत्रों ने कहा कि लगभग घंटे भर चली सुनवाई के बाद जुर्माने की राशि बिल्कुल कम कर दी गई।

न्यायमूर्ति एस.यू.खान, न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति धर्म वीर शर्मा की खण्डपीठ ने सेवानिवृत्त नौकरशाह रमेश चंद्र त्रिपाठी द्वारा इस सप्ताह के प्रारंभ में दायर की गई याचिका खारिज कर दी और 24 सितंबर को फैसला सुनाए जाने के अपने निर्णय को बरकरार रखा।

विशेष पीठ के वरिष्ठतम न्यायाधीश, न्यायमूर्ति खान ने कहा, "यदि फैसला स्थगित कर दिया गया, तो उससे सुनाए जाने के बनिस्बत अधिक समस्या खड़ी होगी।"

खान ने आगे कहा है, "हमने अतीत में सभी पक्षों को इस बात के लिए राजी करने हेतु कई कोशिशें की है कि इस मामले का सुलह के जरिए शांतिपूर्ण समाधान निकाल लिया जाए। लेकिन इसके लिए कोई तैयार नहीं हुआ। लिहाजा एक अदालत के नाते हमें इस मामले में एक आदेश देने की जरूरत पड़ी है।"

न्यायमूर्ति खान के विचारों का समर्थन करते हुए न्यायामूर्ति अग्रवाल ने कहा कि कम से कम तीन प्रधानमंत्रियों, दो केंद्रीय कानूनों और सर्वोच्च न्यायालय को दिए राष्ट्रपति के एक संदर्भ के जरिए भी अदालत के बाहर मामले के शांतिपूर्ण समाधान की कोशिशें की गईं। अग्रवाल ने कहा, "लेकिन वे सभी कोशिशें बेकार साबित हुईं।"

अदालत ने फैसले के अंतिम क्षण में सुलह का राग अलापने के लिए त्रिपाठी की खिंचाई भी की। न्यायमूर्ति खान ने उनसे पूछा, "इतने वर्षो तक जब मामले की सुनवाई चल रही थी, तब आप लोग कहा थे।"

खान ने हालांकि यह भी कहा, "आज भी यदि सभी पक्ष सुलह के जरिए मामले के समाधान के लिए राजी हों तो हम सहर्ष इस कदम का स्वागत करेंगे।"

लेकिन ऐसे समय में जब न्यायाधीश ने इस तरह का खुला प्रस्ताव दिया, तो भी अदालत में सिर्फ एक पक्ष मौजूद था, जिसने कि सुलह के जरिए मामले के समाधान का समर्थन किया। यह पक्ष निर्मोही अखाड़ा था।

निर्मोही अखाड़ा की ओर से अदालत में उपस्थित वकील रंजीत लाल वर्मा ने अंतिम समय में त्रिपाठी की याचिका का समर्थन करने की कोशिश की। इस मामले में अखाड़ा एक पक्षकार है।

इस बीच न्यायमूर्ति शर्मा पूरी सुनवाई के दौरान चुप बैठे रहे। न्यायमूर्ति शर्मा ने ही अन्य दोनों न्यायाधीशों की अनुपस्थिति में सोमवार की देर शाम त्रिपाठी की याचिका स्वीकार की थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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