जी-20 में संरक्षणवाद का मुद्दा उठाएगा भारत

मुखर्जी ने आईसीआरआईईआर द्वारा जी-20 के मुद्दे पर आयोजित एक सम्मेलन में कहा, "जी-20 को इस तरीके से नीतियों को समन्वित करना चाहिए, ताकि टिकाऊ और संतुलित वृद्धि सुनिश्चित हो सके।"

मुखर्जी ने कहा कि जी-20 के सदस्य देशों को वित्तीय स्थिरता के लिए और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को अधिक खुला और पारदर्शी बनाने के लिए मिल कर काम करना चाहिए।

मुखर्जी ने कहा कि भारत, जी-20 समूह के अन्य देशों के साथ मिल कर कुछ देशों में, खास तौर से अमेरिका में बढ़ रहे संरक्षणवाद के रुझान के मुद्दे को उठाएगा।

जी-20 की पांचवीं शिखर बैठक दक्षिण कोरिया में 11और 12 नवंबर को होनी तय है। लिहाजा राष्ट्र प्रमुखों की बैठक के लिए एजेंडे का खाका तैयार करने हेतु समूह 20 के देशों के वित्त मंत्री अगले महीने बैठक करेंगे।

वैश्विक आर्थिक मंदी का जिक्र करते हुए मुखर्जी ने कहा कि इस संकट से उबरने के लिए समन्वित प्रयास किया जाना चाहिए, क्योंकि कोई भी देश इस संकट से बचा नहीं है।

मुखर्जी ने कहा कि वैश्विक संकट उम्मीद से अधिक व्यापक और गंभीर हो रहा है।

अमेरिका सरकार ने व्यापार की आउटसोर्सिग पर लगाम लगाने तथा स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ाने के लिए हाल में कई सारे उपायों की घोषणा की है।

अमेरिकी राज्य ओहियो ने इस महीने के प्रारंभ में कहा था कि सरकारी विभागों में आईटी सेवाओं की आउटसोर्सिग पर रोक लगाई जाएगी। इसके अलावा अमेरिका ने एच-1बी और एल1 श्रेणियों के वीजा शुल्क में भी क्रमश: 2,000 डॉलर और 2,250 डॉलर की बढ़ोतरी कर दी है।

इससे उन भारतीय आईटी कंपनियों के व्यापार पर नकारात्मक असर पड़ेगा, जिनकी 60 प्रतिशत से भी अधिक आमदनी अमेरिका पर निर्भर है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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