बिहार : टिकट बंटवारे में 'महिला सशक्तिकरण' ताक पर
पटना, 17 सितम्बर (आईएएनएस)। बिहार में भले ही पंचायती राज संस्थाओं में 50 प्रतिशत आरक्षण के जरिए महिलाओं के सशक्तिकरण का दावा किया जाता रहा है, लेकिन चुनाव में महिलाओं को टिकट देने के मामले में यहां के राजनीतिक दलों की यह इच्छा जाहिर नहीं होती।
राज्य की दो प्रमुख पार्टियां जनता दल (युनाइटेड) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का विधानमंडल और संसद में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण के सवाल पर नकारात्मक रवैया किसी से छुपा नहीं है। इसलिए इन दलों से बहुत उम्मीद भी नहीं की जा सकती कि वे चुनावी मैदान में अधिक से अधिक महिलाओं को टिकट भी देंगे, लेकिन महिला आरक्षण की मांग का समर्थन करने वाले दो प्रमुख राजनीतिक दल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी इस मामले में दो कदम पीछे ही हैं।
बिहार विधानसभा के होने वाले चुनाव के लिए महिलाओं ने जोरशोर से टिकट की मांग कर रखी है, लेकिन उनकी मांगों पर ये राजनीतिक दल कितना गौर फरमाते हैं यह तो आने वाले दिनों में ही पता चल पाएगा।
आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 1962 में एकीकृत बिहार में 65 महिलाएं चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंची थीं, जो अभी भी एक रिकार्ड है। फरवरी 2005 में हुए विधानसभा चुनाव में 24 महिला प्रत्याशी चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचीं, जबकि नवम्बर 2005 में हुए चुनाव के परिणामों में महिलाओं की संख्या में इजाफा हुआ और महिला सदस्यों की संख्या 26 तक जा पहुंचीं।
पिछले चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) ने जहां 17 महिलाओं को टिकट दिया था, वहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने 14 महिलाओं को मैदान में उतारा था। इसके अलावा कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने नौ-नौ तो जनता दल (युनाइटेड) ने 15 महिलाओं को टिकट दिया था। चुनाव के परिणाम हालांकि महिलाओं के लिए सुखद नहीं रहे थे। लोजपा की सिर्फ एक महिला प्रत्याशी ही चुनाव जीत सकी और राजद की तीन। भाजपा की चार, कांग्रेस की दो तथा जद (यु) की 12 महिलाएं ही विधानसभा पहुंच पाई थीं।
सबसे ज्यादा जद (यु) की महिला उम्मीदवार ही विधानसभा पहुंची थीं। जद (यु) की महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष उषा सिन्हा का दावा है कि इस चुनाव में भी जद (यु) की महिलाएं ही आगे रहेंगी। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी ओर से 33 प्रतिशत महिलाओं को टिकट देने की मांग की है। उन्हें आशा भी है कि उनकी मांग पूरी की जाएगी।
आंकड़ों को देखा जाए तो वर्ष 1995 में हुए विधानसभा चुनाव में 12 महिलाएं विधानसभा में प्रवेश कर सकी थीं, जबकि वर्ष 1990 के चुनाव में 13 महिलाएं विधानसभा में बैठ पाई थीं। इसके पूर्व वर्ष 1985 में हुए चुनाव में 15 तो वर्ष 1980 में 14 महिला प्रत्याशी ही विधानसभा जा सकी थी।
इधर, महिला कांग्रेस की बिहार इकाई की अध्यक्ष विनिता विजय भी कहती हैं कि उनकी पार्टी 33 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण देने के प्रति कृतसंकल्प है। परंतु टिकट के मामले पर वह कहती हैं कि जीतने वाली महिला प्रत्याशियों को ही टिकट दिया जाएगा। कांग्रेस में टिकट मांगने वाली महिलाओं की संख्या अन्य दलों से अधिक देखी जा रही है।
राजद महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष भारती श्रीवास्तव ने टिकट के मुद्दे पर तो कोई बात नहीं की, अलबत्ता उन्होंने राजद द्वारा ही महिला को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा देने की बात अवश्य कह दी।
बहरहाल, कुछ ही दिनों में तय हो जाएगा कि कौन-सी पार्टी महिलाओं को ज्यादा तरजीह दे रही है। दो प्रमुख राजनीतिक दल कांग्रेस और भाजपा हमेशा से महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण का समर्थन करते आए हैं, लेकिन उम्मीदवारों में सूची में उनकी यह इच्छा जाहिर नहीं होती।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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