वीरभद्र सिंह के मामले पर सुनवाई से पीछे हटे दो न्यायाधीश
न्यायमूर्ति आर. बी. मिश्रा और न्यायमूर्ति वी. के. शर्मा की खंडपीठ ने शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा, "हम इस मामले की सुनवाई नहीं करेंगे।"
उन्होंने दोनों पक्षों के अधिवक्ता से कहा कि वह मुख्य न्यायाधीश कुरियन जोसेफ से इस अपील को उचित न्यायालय में ले जाने की मांग करें।
इससे पहले गुरुवार को इस याचिका को सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश जोसेफ और न्यायाधीश राजीव शर्मा के समक्ष प्रस्तुत किया गया था।
सुनवाई के लिए याचिका प्रस्तुत किए जाने पर न्यायमूर्ति जोसेफ ने कहा कि न्यायमूर्ति राजीव शर्मा ने इस मामले पर सुनवाई से इंकार कर दिया है। इसके बाद इस याचिका को सुनवाई के लिए दूसरी खंडपीठ में भेजा गया था।
पांच बार मुख्यमंत्री रह चुके वीरभद्र सिंह ने 14 सितंबर को याचिका दायर की थी जिसमें उन्होंने मांग की है कि उन पर भ्रष्टाचार के मामले की जांच को सीबीआई को स्थानांतरित किया जाए। साथ ही उन्होंने मांग की है कि मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और पुलिस महानिदेशक डी. एस. मन्हास के सीडी मामले की जांच की जाए।
याचिका में सिंह ने कहा कि दिसंबर 2007 में मुख्यमंत्री बनने के बाद धूमल ने उनपर और उनकी पत्नी पर तीन अगस्त 2008 को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज करवाया। यह मामला उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी विजय सिंह मन्कोटिया द्वारा 2007 में जारी की गई ऑडियो सीडी के आधार पर दायर किया गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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