माधव राष्ट्रीय उद्यान में भी हैं बाघ
'स्केट सेंटर फॉर सेल्यूलर एंड मॉलीक्यूलर बायोलॉजी', (सीसीएमबी) हैदराबाद के वैज्ञानिकों ने उद्यान में मिले पद चिन्हों सहित अन्य प्रमाणों के आधार पर यह पुष्टि की है।
यह प्रदेश इस समय बाघों की घटती संख्या के कारण चर्चाओं में है, इस बीच शिवपुरी से आई खबर ने वन विभाग को राहत दी है।
माधव राष्ट्रीय उद्यान में दिसम्बर 2007 से बाघ के विचरण के संकेत मिल रहे हैं, इसके तहत पगमार्क्स, किल , स्केट खरोंच, आवाज तथा अलार्म कॉल के भी प्रमाण एकत्रित किए गए हैं। माधव राष्ट्रीय उद्यान के कर्मचारियों एवं ग्रामीणों ने भी बाघ को देखा है। इसी के चलते उद्यान की दोपहर की और रात्रिकालीन सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
आधिकारिक तौर पर मिली जानकारी के मुताबिक अगस्त 2009 मे वैज्ञानिक तौर पर प्रमाण सीसीएमबी, हैदराबाद को भेजे गए थे, इसके बाद पुन: अप्रैल 2010 में नमूने भेजे गए । इन नमूनों के आधार पर माधव राष्ट्रीय उद्यान में बाघ होने की पुष्टि की गई है।
इस बीच हैदराबाद की वरिष्ठ वैज्ञानिक अनुराधा रेड्डी ने ज्यादा से ज्यादा स्केट नमूने भेजने को कहा है ताकि डीएनए परीक्षण से पता लगाया जा सके कि कितने बाघ हैं और उनका लिंग क्या है।
वन विभाग के अपर मुख्य सचिव एम. के. राय ने माधव राष्ट्रीय उद्यान, शिवपुरी के प्रवास के दौरान अनुराधा रेड्डी से मुलाकात की तभी रेड्डी ने बाघ होने की पुष्टि की।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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