नेपाल की संयुक्त राष्ट्र से तकरार बढ़ी
काठमांडू, 16 सितम्बर (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जबकि नेपाल में शांति प्रक्रिया मेंऔर चार माह के लिए सहयोग जारी रखने को सर्वसम्मति से राजी हो गई है, सरकार ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र प्रमुख बान की-मून एवं नेपाल में उनके प्रतिनिधि करीन लैंडग्रेन द्वारा पेश रिपोर्टो की आलोचना करते हुए इसे असंतुलित बताया और कहा कि नेपाल के साथ स्वायत्त देश की तरह व्यवहार नहीं किया जा रहा है।
कार्यवाहक प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल के कार्यालय द्वारा गुरुवार को जारी आठ पृष्ठों के बयान में कहा गया कि नेपाल में संयुक्त राष्ट्र के मिशन (यूएनएमआईएन) का नेतृत्व करने वाले बान और लैंडग्रेन की रिपोर्ट में दिखाया गया है कि नेपाली सेना के शस्त्र एवं योद्धा तथा विपक्षी माओवादी के लड़ाकू 'नेपाल के संयुक्त राष्ट्र के साथ उत्कृष्ट ऐतिहासिक संबंधों' को बिगाड़ सकते हैं और नेपाल में संयुक्त राष्ट्र के संगठनों की प्रतिष्ठा को कलंकित कर सकते हैं।
कार्यवाहक सरकार ने बान की उस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें बान ने यूएनएससी से कहा है कि यूएनएमआईएन के अधिकार में कोई परिवर्तन 'नवगठित सरकार' से विमर्श के बाद ही किया जाना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र में नेपाल के स्थायी प्रतिनिधि भी इस पर पहले ही आपत्ति उठा चुके हैं। साथ ही नेपाल के चार पूर्व विदेश मंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र के उस आधिकारिक रिपोर्ट पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें "वैधानिक रूप से गठित नेपाल की सरकार के औचित्य" पर सवाल उठाया गया है।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि सत्तारूढ़ नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिवादी) तथा नेपाली कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता इस पर नाराजगी प्रकट कर चुके हैं और उन्होंने यूएनएमआईएन के साथ बातचीत के उस लहजे पर सवाल उठाया है, जिसमें उसका दृष्टिकोण 'लगातार अपमानजनक या उपहासपूर्ण' रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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