भारत-पाक युद्ध की चेतावनी

रेणु अगाल
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
11 सितंबर के हमले की बरसी पर एक अमरीकी शोध संगठन की चेतावनी कहती है कि भारत पर मुंबई हमले की तरह कोई और हमला होता है तो भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसी स्थिति बन सकती है
अमरीकी शोध संगठन ‘बाइपार्टिज़न पॉलिसी सेंटर’ के ‘नैशनल सिक्योरिटी प्रिपेयर्डनेस ग्रुप’ का कहना है कि दोनों देशों के बीच ऐसी स्थिति ना आने देना विश्व के लिए एक बड़ी चुनौती होगी.
संगठन ने 9/11 की नवीं बरसी पर चरमपंथ को लेकर छिड़ी बहस के बीच अपनी 42 पन्नों की रिपोर्ट में कहा है कि किसी बड़े हमले की सूरत में भारत पर राजनीतिक दबाव होगा कि वो कुछ ना कुछ करे.
ऐसे में भारत सीमा पार पाकिस्तान में स्थित चरमपंथी कैंपो को ख़त्म करने की कार्रवाई कर सकता है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की ये प्रतिक्रिया एक पूर्ण युद्ध में भी तब्दील हो सकती है. अगर ऐसा होता है तो ये 1947 के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच चौथा युद्ध होगा.
भारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं इसलिए इस युद्ध में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का खतरा भी है.
ऐसी स्थिति में पाकिस्तान अपनी शक्तियाँ पूर्वी सीमा पर लगाएगा और उसका फ़ायदा तालेबान को होगा जो कि पश्चिमी सीमा में पाकिस्तान सरकार से लड़ रहा है.
इस घटनाक्रम से अल क़ायदा समेत क्षेत्र के सभी चरमपंथी गुटों का फायदा होगा.
रिपोर्ट के लेखक पीटर बर्जन और ब्रुस हौफमैन का कहना है कि मुंबई के हमले के बाद भारत ने बहुत संयम दिखाया था.
ये रिपोर्ट पाकिस्तान में तालेबान की बढ़ती गतिविधियों की चर्चा भी करती है और कहती है कि पाकिस्तान में मौजूद तालेबान अब अमरीका और यूरोप के लिए ख़तरा बन रहा है.
न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में कार बम हमले की कोशिश के लिए गिरफ्तार किए गए फ़ैसल शहज़ाद को भी पाकिस्तानी तालेबान ने प्रशिक्षित किया था.
रिपोर्ट में डेविड कोलमैन हेडली के लश्कर-ए-तैबा से संपर्क और मुम्बई हमले में उनकी भूमिका का भी ज़िक्र है.












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