बिहार विधानसभा चुनाव: परिसीमन ने बिगाड़ा गणित

परिसीमन में राज्य के 42 विधानसभा क्षेत्र इतिहास के पन्नों में दफन हो गए हैं तो इतने ही नए क्षेत्रों का अभ्युदय भी हुआ है। इसके कारण 42 विधानसभा क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति में काफी कुछ बदलाव आया है। इस कारण 14 वीं विधानसभा चुनाव में इन क्षेत्रों से जीत चुके विधायक अपने लिए नई जमीन तलाश रहे हैं।
परिसीमन का सबसे अधिक खामियाजा जनता दल (युनाइटेड) उठाना पड़ा है जिसके 16 विधायक इससे प्रभावित हुए हैं। इनमे कई मंत्री भी शामिल हैं जिन्हें नई जमीन तलाश करने की मशक्कत करनी पड़ रही है। इस सूची में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भी नौ विधायक शामिल हैं जो खुद के लिए नया आशियाना तलाश रहे हैं।
इसके अलावा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) और लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के दो-दो तो कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के एक-एक विधायक अपने लिए नए ठौर तलाश रहे हैं।परिसीमन ने सरकार के जिन मंत्रियों का खेल बिगाड़ा है उनमें जद (यु) के शाहिद अली, रेणू कुमारी, हरिनारायण सिंह, भगवान सिंह कुशवाहा और भाजपा के नंदकिशोर यादव, चंद्रमोहन राय, जनार्दन सिंह सिग्रीवाल शामिल हैं।
भाजपा के एक विधायक का कहना है कि क्षेत्र में बदलाव होने से सोशल इंजीनियरिंग यानी जातीय समीकरण गड़बड़ा गया है। ऐसे में नए लोगों के भरोसे ही चुनाव लड़ा जाएगा। उनका कहना है कि नए क्षेत्र में टिकट दावेदारों की संख्या में भी बढ़ोतरी हो गई है। इसके अलावा भी कई क्षेत्र ऐसे हैं जो सुरक्षित हो गए हैं। यहां पर ज्यादा परेशानी हो रही है।
परिसीमन में 243 सीटों की संख्या में तो कोई बदलाव नहीं आया परंतु अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित सीटों की संख्या 39 से घटकर 38 हो गई है जबकि कटोरिया और मनिहारी सीटें सामान्य से अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित कर दी गई हैं। इसके अलावा 10 सुरक्षित क्षेत्र सामान्य हो गए हैं जबकि 13 सामान्य क्षेत्र सुरक्षित बन गए हैं। इस कारण भी कई 'माननीयों' को अब जनता ही जनार्दन लग रही है।इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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