इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में बदलाव की जरूरत : सिब्बल
आईआईटी परिषद की एक बैठक के बाद सिब्बल ने संवाददाताओं को बताया, "कोचिंग की वर्तमान व्यवस्था हर हाल में समाप्त होनी चाहिए, क्योंकि यह गुणवत्ता के लिए हानिकारक है।"
इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं के तरीके में बदलाव का प्रस्ताव मंत्रालय द्वारा पहले ही दिया किया जा चुका है।
इसके लिए आईआईटी खरगपुर के निदेशक दामोदर आचार्या के नेतृत्व में एक समिति गठित की गई थी, जिसने इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए 12वीं के परिणाम को महत्व देने और राष्ट्रीय स्तर पर अभिरुचि परीक्षा आयोजित करने की सिफारिश की थी।
सिब्बल ने कहा, "आचार्या समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है और इस बात को व्यापक तौर पर स्वीकृति मिली है कि प्रवेश परीक्षा प्रणाली में परिवर्तन की आवश्यकता है, लेकिन यह परिवर्तन कैसे किया जाए, अभी तय नहीं हो पाया है।"
सिब्बल ने कहा कि यद्यपि आचार्या समिति की रिपोर्ट में आम सहमति नहीं बन सकी है, लेकिन सभी सदस्य बदलाव की आवश्यकता पर सहमत हैं।
सिब्बल ने कहा, "इसमें दो बातें हैं। पहली बात यह कि वर्तमान कोचिंग व्यवस्था हर हाल में समाप्त होनी चाहिए, क्योंकि यह गुणवत्ता के लिए हानिकारक है। दूसरी बात यह कि कई सारी प्रवेश परीक्षाओं में शामिल होने को लेकर बच्चों और उनके परिजनों पर वित्तीय व मनोवैज्ञानिक दबाव पड़ता है।"
सिब्बल ने कहा कि इस बारे में इस तरह के सुझाव हैं कि प्रवेश के लिए, विद्यार्थियों को राज्यस्तर पर दिए गए प्रतिशत पर विचार किया जाए।
उन्होंने कहा, "हमें 12वीं के स्तर पर ही विद्यार्थियों के प्रदर्शन पर गौर करना चाहिए, अन्यथा कुछ राज्यों के विद्यार्थी पीछे छूट जाएंगे। 12वीं की परीक्षा में प्राप्त हुए अंकों को महत्व दिया जाएगा और ये अंक पूरे वर्ष भर के प्रदर्शन पर आधारित होंगे। इससे कोचिंग अपनेआप बंद हो जाएगी।"
सिब्बल ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सचिव टी.रामासामी के नेतृत्व में एक समिति गठित की गई है। समिति तीन महीनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंप देगी। उन्होंने कहा, "उसके बाद हम सभी आईआईटी को बुलाएंगे और इस मुद्दे पर पूर्ण चर्चा करेंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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