ईद के 'चांद' पर महंगाई का ग्रहण
महंगाई का असर कपड़ों से लेकर सेंवइया तक पर दिखाई दे रहा है, जिससे आम लोगों के साथ दुकानदार तक परेशान नजर आ रहे हैं। मुस्लिम समुदाय के इस सबसे बड़े पर्व के मौके पर जमकर खरीदारी करने वाले भी इस बार अपनी जेबें खुलकर ढीली नहीं कर रहे हैं।
इसकी वजह हैं आसमान छूती कीमतें। बढ़ी कीमतों से न सिर्फ आम लोगों की मुश्किलें बढ़ी हैं, बल्कि दुकानदारों का करोबार भी प्रभावित हुआ है। पुरानी दिल्ली की चितली कबर बाजार के कपड़ा व्यवसायी मोहम्मद जाकिर ने बताया, "बीते साल की तुलना में इस बार हमारा कारोबार बहुत कम है। मैं इसकी वजह महंगाई को मानता हूं। इस बार लोगों में खरीदारी को लेकर ज्यादा जोश नहीं दिख रहा है।"
ऐतिहासिक फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम मौलाना मुफ्ती मुकर्रम भी मानते हैं कि इस बार महंगाई ने लोगों की खुशियों पर असर डाला है। उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "वाकई अब लोगों में ईद को लेकर पहले की माफिक खुशी नहीं रही। इसकी एक वजह महंगाई भी है। महंगाई के चलते लोगों को अपनी जरूरतों का दायरा घटाना पड़ रहा है।"
उन्होंने कहा, "वैसे भी वक्त के साथ लोगों में ईद पर जश्न मनाने का चलन कम होता जा रहा है। इस बार आसमान छूती महंगाई ने बच्चों की खुशियों पर खास तौर से असर डाला है। हम सभी जानते हैं कि बच्चों के लिए ईद कुछ ज्यादा ही खास होती है।"
ईद पर बनाए जाने वाले प्रमुख पकवानों में शामिल सेवइयों की कीमतें इस बार कहीं ज्यादा हैं। दिल्ली के बटला हाउस बाजार में सेवइयों के विक्रेता अनीस अहमद कहते हैं, "पिछले साल साधारण किस्म की सेवइयां 40-50 रुपये प्रति किलोग्राम बिकी थीं। इस बार ये 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रही हैं। अच्छी किस्म की सेवइयों के बारे में तो न पूछें। इनकी कीमतें गरीब आदमी की पहुंच से कहीं ज्यादा हैं।"
ऑल इंडिया महिला मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अम्बर ने भी इस बार ईद की खरीदारी करते समय महंगाई की मार को महसूस किया। उन्होंने कहा, "इस बार महंगाई ने आम लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। ईद पर एक गरीब आदमी पूरी मेहनत-मशक्कत के बाद अपने लिए कुछ खरीदारी कर पाता है। अब आप ही बताइए कि इस महंगाई में गरीब लोग अपनी जरूरतों की चीजें कैसे खरीद पाएंगे।"













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