'...तो बढ़ेगी अल कायदा में भर्तियां'

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि 11 सितंबर 2001 की बरसी पर एक चर्च के पादरी की ओर से क़ुरान की प्रतियाँ जलाने की घोषणा से चरमपंथ को बढ़ावा मिलेगा और अल क़ायदा जैसे चरमपंथी संगठन इसका फ़ायेदा उठाएंगे.
ओबामा ने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में काम कर रहे अमरीकी सैनिकों का जीवन भी ख़तरे में पड़ जाएगा.
फ़्लोरिडा के एक छोटे से चर्च के पादरी टेरी जोन्स ने 11 सितंबर को अमरीका पर अल क़ायदा के हमले की नौंवीं बरसी पर क़ुरान की प्रतियाँ जलाने की घोषणा की है.
टीवी चैनल एबीसी को दिए एक साक्षात्कार में ओबामा ने कहा, ''उन्होंने जो करने का प्रस्ताव दिया है वह एक अमरीकी के मूल्यों के विपरीत है, यह देश स्वतंत्रता और धार्मिक सहिष्णुता की भावना के आधार पर बना है.''
ओबामा ने कहा, ''व्यावहारिक रूप से मैं उन्हें समझाना चाहता हूँ कि वे जिस ख़तरनाक़ खेल के बारे में बात कर रहे हैं, उससे हमारे जवानों की ज़िंदगी ख़तरे में पड़ जाएगी.''
उन्होंने कहा, ''यह अल क़ायदा के लिए नौजवानों को उकसाने और संगठन में भर्ती करने का बेहतरीन अवसर होगा. इससे पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान जैसी जगहों पर हिंसा में बढ़ोत्तरी हो सकती है. इससे उन लोगों की भर्ती में तेज़ी आएगी जो अमरीकी या यूरोपीय शहरों में ख़ुद को बम से उड़ा देने की इच्छा रखते हैं. ''
राष्ट्रपति ने कहा, '' मैं आशा करता हूँ कि वे इस बात को समझेंगे कि जो वे करने जा रहे हैं, वह एक विध्वंसक कार्रवाई है.''
टेरी जोन्स की इस घोषणा पर मुस्लिम देशों ने नाराज़गी जताई है. नैटो और अफ़ग़ानिस्तान में शीर्ष अमरीकी कमांडरों ने भी इसका विरोध किया है.
लेकिन जोन्स अपनी इस योजना पर अड़े हुए हैं. उनका कहना है कि अब शायद वह समय आ गया है कि हम खड़े होकर नए ढंग से आतंकवाद का विरोध करे.
उन्होंने कहा,''इसलिए हम 11 सितंबर की अपनी योजना पर अभी भी कायम हैं. ''












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