हड़ताल के दौरान बंगाल में 1 की मौत, 14 घायल (लीड-3)
हड़ताल के दौरान बीरभूम जिले के नैनूर गांव में कथित रूप से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए एक बम हमले में तृणमूल कांग्रेस के एक कार्यकर्ता की मौत हो गई और एक महिला सहित पांच लोग घायल हो गए।
बीरभूम जिले के पुलिस अधीक्षक हुमायू कबीर ने कहा कि यह घटना दो राजनीतिक दलों के बीच संघर्ष के कारण हुई।
तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने नंदीग्राम और कोंटई में माकपा के कार्यालयों में तोड़फोड़ की जिसमें माकपा के तीन कार्यकर्ता घायल हो गए। उत्तरी 24 परगना जिले में माकपा के कार्यकर्ताओं के तृणमूल समर्थकों को दुकानें खोलने से रोकने के कारण हुए संघर्ष में दो लोग घायल हो गए।
प्रदेश में कानून का उल्लंघन करने के मामलों में राजनीतिक दलों के करीब 1,200 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है।
कोलकाता में हड़ताल के चलते जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे से निजी उड़ान सेवाओं की कुल 129 उड़ाने रद्द कर दी गईं और एयर इंडिया की एक अंतर्राष्ट्रीय उड़ान सहित कुल 22 उड़ानें रद्द की गईं।
शहर में यातायात पूरी तरह से बंद रहा। तारातला जैसे औद्योगिक इलाकों में सड़कें सूनी रहीं। सरकारी और निजी क्षेत्र की बसें भी सड़कों पर नहीं उतरीं। चाय बागान हालांकि इस हड़ताल से प्रभावित नहीं हुए।
प्रदेश में बैंक, अन्य कार्यालय और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान बंद रहे। हड़ताल से बाहर रखने के कारण रेल और मेट्रो रेल सेवाएं सामान्य हैं। यात्रियों को परिवहन का केवल यही एकमात्र साधन उपलब्ध है।
वाम मोर्चा समर्थित राज्यों पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और केरल में बंद का व्यापक असर रहा। तमिलनाडु जैसे राज्यों में बंद का मिलाजुला और कर्नाटक में मामूली प्रभाव पड़ा।
वित्तीय राजधानी मुंबई और राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में हड़ताल का असर अपेक्षाकृत कम रहा लेकिन आटो रिक्शा चालकों के हड़ताल में शामिल होने से दोनों शहरों में यात्रियों को कुछ परेशानी हुई।
कांग्रेस समर्थित राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) के अध्यक्ष जी. संजीव रेड्डी ने कहा कि आठ मजदूर संघों की एक दिवसीय हड़ताल में पूरे देश के 10 करोड़ से अधिक श्रमिकों ने हिस्सा लिया। उन्होंने दावा किया कि हड़ताल को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का समर्थन हासिल है।
राज्यसभा सदस्य और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की समन्वय समिति के संयोजक रेड्डी ने हैदराबाद में आईएएनएस से कहा, "हड़ताल 99 प्रतिशत सफल रही है।"
उन्होंने कहा कि बैंक, बीमा, कोयला, ऊर्जा, दूरसंचार, बंदरगाह, परिवहन और पेट्रोलियम के संगठित क्षेत्र के करीब 10 करोड़ कर्मचारियों ने हड़ताल में हिस्सा लिया।
रेड्डी ने दावा किया कि हड़ताल के लिए उनको कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का समर्थन हासिल है।
उन्होंने कहा कि व्यापार संगठनों की सौदेबाजी की क्षमता की बहाली के लिए हड़ताल की गई।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1990 के दशक के शुरू में केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा बड़े व्यापारिक संस्थानों के पक्ष में अपनाई गई गैर जिम्मेदाराना नीतियों के कारण श्रमिकों की स्थिति कमजोर हुई।
यह पूछे जाने पर कि उन्होंने वाम दलों से जुड़ी ट्रेड यूनियनों 'सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन' (सीटू) और आल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) का सहयोग क्यों लिया, रेड्डी ने कहा, "हम सौदेबाजी की अपनी क्षमता बहाल करना चाहते हैं।"
रेड्डी ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सरकार के अन्य नेता श्रमिकों की मांगों पर चर्चा करने के इच्छुक हैं।
उन्होंने कहा कि हड़ताल केवल केंद्र सरकार नहीं वरन् राज्यों और केंद्र दोनों की नीतियों के विरोध में है।
मुंबई में आटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के भी हड़ताल में शामिल होने के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हड़ताल में बैंक कर्मचारियों की यूनियनों के भी शामिल होने से मुंबई में बैंकों की शाखाओं और मुख्यालयों में काम प्रभावित हुआ।
वाम मोर्चा के शासन वाले त्रिपुरा में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। अधिकांश बाजार, दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान, बैंक और वित्तीय संस्थान बंद रहे। सड़क यातायात ठप्प है और त्रिपुरा से देश के अन्य हिस्सों के लिए रेल सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं।
केरल के कार्यालयों में उपस्थिति बहुत कम रही और निजी बसें, टैक्सियां तथा आटो रिक्शा का परिचलान नहीं हुआ। जहरीली शराब पीने से सोमवार को 23 लोगों की मौत होने के कारण मलप्पुरम जिले को बंद से मुक्त रखा गया।
बंद के कारण तमिलनाडु कपड़ा उद्योग और चेन्नई से घरेलू उड़ानें प्रभावित हुईं जबकि शिक्षण संस्थान खुले रहे। तिरुपुर और कोयम्बटूर के करीब तीन लाख कपड़ा मजदूरों ने हड़ताल में हिस्सा लिया।
तिरुचिरापल्ली में गोल्डेन रॉक रेलवे इकाई के करीब 4,000 कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए।
असम में जनजीवन प्रभावित हुआ लेकिन चाय और तेल उत्पादन क्षेत्र इससे अछूता रहा। हड़ताल का प्रमुख असर परिवहन क्षेत्र पर देखा गया। बसें, ट्रक और टैक्सियां सड़कों से दूर हैं।
हिमाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बैंक और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान बंद रहे।
अधिकांश निजी होटल, बैंक और सरकारी बीमा कंपनियों के साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र की भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के कार्यालय भी बंद हैं। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के कर्मचारी बहरहाल हड़ताल में शामिल नहीं हुए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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