सुबह रिहा हो सकते हैं बंधक पुलिसकर्मी

मणिकांत ठाकुर
बीबीसी संवाददाता, पटना
माओवादी प्रवक्ता अविनाश ने बीबीसी को बताया है कि बिहार में बंधक बनाए गए पुलिसकर्मियों को रविवार सुबह आठ बजे तक छोड़ दिया जाएगा.
माओवादी प्रवक्ता अविनाश ने बीबीसी को बताया, "बुद्धिजीवियों, आम लोगों और बंधक बनाए गए पुलिसकर्मियों के परिजनों के बार-बार अनुरोध का ख़्याल रखते हुए हमारी ज़ोनल कमेटी ने बंधक पुलिसकर्मियों को मुक्त करने का फ़ैसला किया है."
ये पूछे जाने पर कि दो दिन पहले जिस बंधक पुलिसकर्मी को मार दिए जाने की सूचना माओवादियों की तरफ़ से आई थी वो ग़लत क्यों थी, अविनाश ने कहा, "इस फ़ैसले के बारे में ज़ोनल कमेटी का मेरे पास फ़ोन आया था लेकिन जहां मैं था वो जगह दूर होने के कारण और लाइन में बाधा की वजह से मैं नाम ठीक से सुन नहीं पाया था. और हड़बड़ी में मुझसे ये चूक हो गई जिसका मुझे बेहद अफसोस है औj मैंने मी़डिया कर्मियों से माफी भी मांगी है."
शनिवार को दो माओवादियों की गिरफ्तारी के बारे में उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन ने हेलिकॉप्टर से जंगल के एक गांव में पैराशूट के ज़रिए जवानों को उतारा था और उन जवानों ने गांव के दो आम लोगों को गिरफ्तार किया है और दबाव देकर उनसे स्वीकार करवाया कि वे लखीसराय की मुठभेड़ में शामिल थे.
उन्होंने मुख्यमंत्री के बातचीत के आमंत्रण को ढकोसला करार देते किसी तरह की बातचीत से साफ़ इंकार कर दिया है.
इससे पहले शनिवार शाम पटना में हुई सर्वदलीयत बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने इस मसले पर माओवादियों के प्रतिनिधि से आमने-सामने बातचीत की पेशकश की थी.
माओवादी प्रवक्ता अविनाश ने मारे गए पुलिसकर्मी लूकस टेटे के बारे में कहा कि वो हथियारबंद हमलावर बनकर आए थे इसलिए उन्हें रास्ते से हटाना पड़ा.












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