कृष्ण का संदेश फैलाने में नेपाल का भागीदार बना भारत
जन्माष्टमी या श्रीकृष्ण का जन्मदिन 'अनुगीता' के प्रचार-प्रसार का एक बेहतरीन अवसर हो सकता है और इसके लिए नेपाल व भारत साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
काठमांडू के एक प्रकाशन 'कॉमिनिक' का कहना है कि 'अनुगीता' के सामान्य हिंदी और जर्मन भाषा के संस्करणों का कार्य प्रगति पर है।
'अनुगीता' के नेपाली गद्य और छंद संस्करण भी अब उपलब्ध हैं। राष्ट्रपति राम बरन यादव मई में यहां इन संस्करणों का औपचारिक लोकार्पण करेंगे। भारत सरकार ने इसके लिए बी.पी. कोइराला के नेतृत्व वाले भारत-नेपाल फाउंडेशन को धन उपलब्ध कराया था।
भगवद्गीता में श्रीकृष्ण के युद्ध और रक्तपात से पहले दिए गए उपदेश हैं तो 'अनुगीता' में उत्कृष्ट व्यक्ति बनने के लिए शांतिकाल में दिए गए कृष्ण के संदेश संग्रहित हैं।
'अनुगीता' अश्वमेध पर्व या महाभारत की 14वीं किताब में मिलती है। जब शांतिकाल में युद्ध विजेता अर्जुन गीता की शिक्षाओं को भूल जाते हैं तो वह कृष्ण से उन्हें दोहराने के लिए कहते हैं। 'अनुगीता' में उसी समय के कृष्ण के संदेश हैं।
सबसे पहले 19वीं शताब्दी में इसका अंग्रेजी में अनुवाद हुआ था। भारतीय जज व भारतविद काशीनाथ ˜यंबक तेलंग ने यह अनुवाद किया था। एक शताब्दी से भी लंबे समय बाद दूसरी बार 2006 में फिर नया अंग्रेजी अनुवाद आया। नेपाली विद्वान जगदीश शर्मा ने यह अनुवाद किया था।
अब इस किताब का नेपाली संस्करण भी उपलब्ध है। नेपाली विद्वान श्रीहरि रूपेखति ने इसे पेश किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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