'तेजी से होगा श्रीलंकाई तमिलों के पुनर्वास कार्य'
श्रीलंका के तीन दिवसीय दौरे के तहत भारत की विदेश सचिव निरुपमा राव सोमवार को कोलंबो पहुंची थी। उन्होंने बुधवार को श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के टेंपल ट्रीज स्थित आवास पर उनसे मुलाकात की।
राव ने राजपक्षे को बताया कि भारत अपने हाथ में ली परियोजनाओं को निपटाने के कार्य में तेजी लाएगा। इन परियोजनाओं में युद्ध से प्रभावित तमिलों के पुनर्वास और उत्तरी क्षेत्र में एक रेलवे लाइन का पुनर्निर्माण शामिल है।
राव ने मुल्लइतिवू और त्रिंकोमाली का दौरा कर आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों से बातचीत कर उन्हें आश्वासन दिया कि भारत उनके पुनर्वास के लिए 50,000 मकानों के निर्माण कार्य में तेजी लाएगा। राव ने मंगलवार को वावूनिया, किलिनोच्ची और जाफना का दौरा किया था।
मुल्लइतिवू में ही श्रीलंका की सेना और एलटीटीई के बीच अंतिम संघर्ष हुआ था। सरकारी एजेंट एन. वेथानायकम ने राव को सूचित किया कि इस इलाके में 1,6000 लोगों के पुनर्वास का काम पूरा किया जा चुका है।
भारत के विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि उन्होंने आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की मदद के लिए भारत सरकार की तरफ से प्राप्त सहायता की उन्होंने काफी सराहना की।
श्रीलंकाई समाचार पत्र 'संडे टाइम्स' में छपी एक खबर में दावा किया गया है कि भारत पुनर्निर्माण कार्यों के लिए लगभग 20,000 कामगारों को यहां ला रहा है। राव ने उन खबरों का खंडन किया।
राव ने श्रीलंका की प्रमुख बड़ी पार्टियों के नेताओं से भी मुलाकात की। राव ने यूएनपी और विपक्ष के नेता रानिल विक्रमसिंघे, तमिल नेशनल एलायंस और सिलोन वर्कर्स कांग्रेस के नेताओं से भी मुलाकात की।
मनमोहन सिंह सरकार ने राव को श्रीलंका के दौरे पर तमिलनाडु में अपनी संप्रग सहयोगी पार्टी को यह सुनिश्चित करने के लिए भेजा था कि वह युद्ध के दौरान विस्थापित हुए तमिल नागरिकों के पुनर्वास के काम में तेजी लाने के लिए अपनी ओर से हरसंभव प्रयास कर रही है।
प्रधानमंत्री ने श्रीलंका के उत्तरी प्रांत में एलटीटीई के साथ युद्ध के दौरान तबाह हुए तमिलों के राहत एवं पुनर्वास कार्य में मदद के लिए 500 करोड़ रुपये की राशि और 50,000 मकानों का निर्माण कराने की घोषणा की थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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