'केन्द्र और बिहार सरकार में समन्वय का अभाव'
वैसे रविवार को लखीसराय में पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ के बाद यह बात भी उजागर हो गई कि पुलिस बल कहीं न कहीं कमजोर पड़ रहा है। 'बिहार पुलिस मेंस एसोसिएशन' का मानना है कि अगर इस अभियान में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवान शामिल होते तो शायद यह घटना नहीं घटती।
इस संगठन के महामंत्री क़े क़े झा कहते हैं कि जब तक राजनेताओं के बीच सामंजस्य स्थापित नहीं होगा नक्सली ऐसी घटनाओं को अंजाम देते रहेंगे। केन्द्र और राज्य सरकारों के विरोधाभासी बयानों से नक्सलियों का मनोबल बढ़ा है।
उन्होंने कहा, "राज्य के मुख्यमंत्री नीताश कुमार ने भी पिछले दिनों दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री के साथ नक्सलवाद के मुद्दे पर बैठक के बाद नक्सलियों पर बल प्रयोग से काबू नहीं पाने की बात कही थी। अब क्या कहा जाएगा। लखीसराय की मुठभेड़ में सात पुलिसकर्मियों को हमने खो दिया है और आज हमारे चार पुलिसकर्मी उनके चंगुल में हैं।"
इधर, पुलिस अधिकारियों की मानें तो दंतेवाड़ा की घटनाओं के बाद सीआरपीएफ द्वारा किसी भी अभियान में 24 घंटे पूर्व सूचना के बाद शामिल होने की बात की जा रही है। राज्य के पुलिस महानिरीक्षक (ऑपरेशन) क़े एस़ द्विवेदी भी मानते हैं कि सीआरपीएफ के इस निर्णय के बाद राज्य पुलिस को नक्सल विरोधी अभियान चलाने में मुश्किल आ रही है।
द्विवेदी ने बताया कि कोई बड़ा अभियान चलाने के 24 घंटे पूर्व तो सूचना दी जा सकती है परंतु जल्दबाजी में सीआरपीएफ का सहयोग नहीं मिलने पर राज्य पुलिस को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। पूलिस सूत्रों के अनुसार सीआरपीएफ के महानिदेशक और राज्य के पुलिस महानिशक के बीच दो दिन पूर्व हुई वार्ता में इस समस्या के समाधान होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
उल्लेखीय है कि रविवार को लखीसराय जिले के कजरा थाना क्षेत्र में हुई पुलिस-नक्सली मुठभेड़ में सात पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे जबकि चार पुलिसकर्मी अब भी नक्सलियों के कब्जे में हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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