कश्मीर समस्या पर बातचीत के लिए गिलानी ने 5 शर्तें रखीं

बातचीत के लिए गिलानी ने रखीं शर्तें
अल्ताफ़ हुसैन

बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर

भारत प्रशासित कश्मीर के सबसे प्रमुख अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने कश्मीर समस्या के हल के लिए भारत सरकार के साथ राजनीतिक चर्चा के लिए पाँच शर्तें रखी हैं.

उन्होंने कहा है कि इन शर्तों के पूरा होने के बाद ही बातचीत के लिए माहौल तैयार हो सकेगा. अपने निवास पर पत्रकारों से उन्होंने कहा कि वे सरकार की ओर से राजनीतिक बातचीत के प्रस्ताव के जवाब में ये शर्तें रख रहे हैं.

81 वर्षीय हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के एक धड़े के नेता गिलानी ने कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय समस्या के रुप में स्वीकार करने की शर्त तो रखी लेकिन इस बार उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव को लागू करने और पाकिस्तान को बातचीत में शामिल करने की अपनी पुरानी मांग नहीं दोहराई.

उल्लेखनीय है कि भारत प्रशासित कश्मीर में लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों और हिंसा के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अलगाववादी नेताओं से राजनीतिक चर्चा की अपील की थी.

अपनी शर्तें गिनाते हुए कि वार्ता शुरु करने के लिए भारत को पहले यह स्वीकार करना होगा कि कश्मीर की समस्या एक अंतरराष्ट्रीय समस्या है.उनकी दूसरी शर्त है कि भारत सरकार को कश्मीर से सेना हटाना चाहिए और इस प्रक्रिया की निगरानी का काम किसी 'विश्वसनीय एजेंसी' को सौंपना चाहिए.

गिलानी की तीसरी शर्त है कि भारत के प्रधानमंत्री को सार्वजनिक रुप से यह आश्वासन भी देना होगा कि इसके बाद से कश्मीर में न तो किसी की गिरफ़्तारी होगी और न किसी की जान ली जाएगी.

अलगाववादी नेता ने चौथी शर्त यह रखी है कि सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा किया जाएगा और उनके ख़िलाफ़ सारे मुक़दमे वापस ले लिए जाएँगे. राजनीतिक बंदियों में उन्होंने मोहम्मद अफ़ज़ल गुरु, मिर्ज़ा निसार हुसैन और मोहम्मद अली भट का नाम लिया है. इन तीनों को ही भारतीय अदालतों ने मौत की सज़ा सुनाई है.

उनकी अंतिम शर्त यह है कि राज्य में हिंसा के लिए दोषी सभी लोगों को सज़ा दी जाएगी. उनका कहना है, "इसकी शुरुआत पिछले जून से अब तक राज्य में मारे गए 65 लोगों की मौत के लिए ज़िम्मेदार लोगों को युद्धापराध के लिए सज़ा देने से की जा सकती है."

81 वर्षीय सैयद अली शाह गिलानी ने कहा है कि ये क़दम उठाने के बाद ही ऐसा माहौल तैयार हो सकेगा जिसमें कश्मीर के नेता मिलकर चर्चा कर सकेंगे और कश्मीर के शांतिपूर्ण हल के लिए जनमत तैयार कर सकेंगे.

उन्होंने कहा है कि यदि भारत सरकार ये क़दम तत्काल उठाती है तो वे घाटी में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को ख़त्म करने पर विचार करेंगे. उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार इन न्यूनतम आवश्यक शर्तों को पूरा नहीं करती है तो विरोध प्रदर्शन तेज़ कर दिए जाएँगे.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा है कि राजनीतिक बंदियों को ईद से पहले रिहा किया जाना चाहिए. ईद को अब दस दिनों से भी कम समय बचा है. हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के एक धड़े के नेता कश्मीर सैयद अली शाह गिलानी भारत प्रशासित कश्मीर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों की अगुवाई कर रहे हैं.

गिलानी ने कश्मीर छोड़ो अभियान शुरु किया, उसके बाद दो महीनों से अधिक समय से कश्मीर घाटी बंद ही रही है. या तो विरोध प्रदर्शनों की वजह से या फिर राज्य सरकार की ओर से लगाए गए कर्फ़्यू की वजह से.

इस बीच विरोध प्रदर्शन कई बार हिंसक हुए और विभिन्न स्थानों पर सुरक्षाबलों को गालीबारी करनी पड़ी. गोलीबारी में साठ से अधिक लोगों की मौत हुई है और कई अन्य घायल हुए हैं.

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