शासन पर प्रधानमंत्री, संप्रग की पकड़ ढीली : भाजपा (राउंडअप)

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरूण जेटली ने संयुक्त रूप से जारी एक बयान में कहा है, "संसद के मानसून सत्र ने साबित कर दिया है कि सरकार की कार्यप्रणाली में बिखराव है। पूरा विपक्ष एकजुट दिखा, जबकि संप्रग सरकार पूरे सत्र में अलग-थलग नजर आई।"

भाजपा नेताओं ने कहा, "प्रधानमंत्री की प्रभावी तरीके से शासन करने और कई संकटों को रोक पाने की क्षमता घटी है। गृह मंत्री पी.चिदंबरम अपने नक्सलविरोधी मुहिम ज्यादा आगे नहीं ले जा पा रहे हैं। ऐसा लगता है कि वित्त मंत्री, प्रणब मुखर्जी ममता बनर्जी की नक्सलियों के प्रति उदार दृष्टिकोण को महत्व दे रहे हैं।"

मानूसन सत्र के दौरान पार्टी के प्रदर्शन के बारे में बताने के लिए आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सुषमा स्वराज ने नई दिल्ली में कहा, "हम कई मुद्दों पर सरकार को घेरने में कामयाब रहे। महत्वपूर्ण बात यह है कि चाहे महंगाई का मुद्दा हो या फिर भोपाल गैस त्रासदी का मामला, हर बार सरकार अलग-थलग पड़ गई। पूरे सत्र में प्रतिपक्ष एकजुट रहा।"

उन्होंने कहा, "कुछ मुद्दे जरूर रहे जहां हमारी राय अन्य विपक्षी दलों से अलग रही। परमाणु दायित्क विधेयक पर हमारी कुछ आपत्तियां थीं जिन्हें सुधार लिया गया। इसके बाद हमने इस विधेयक का समर्थन किया और यह पारित हो गया। जम्मू एवं कश्मीर के मसले पर हमारी राय अलग रही।"

सुषमा ने कहा कि संप्रग सरकार 'फ्लोर मैनेजमेंट' में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस सत्र में सरकार ने महंगाई के मुद्दे पर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास किया।

स्वराज ने कहा, "सरकार ने अपने निर्णय को वापस लिया और शत्रु संपत्ति संशोधन एवं अभिपोषण अध्यादेश-2010 के प्रावधानों को तीन महीने के भीतर हल्का कर दिया।"

इस मौके पर अरूण जेटली ने कहा कि केंद्र की संप्रग सरकार का नेतृत्व कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विभाजित है।

उन्होंने कहा कि सरकार में शामिल कुछ लोगों की प्राथमिकता खाद्य सुरक्षा विधेयक, तो कुछ की परमाणु दायित्व विधेयक है। हर मंत्री अपने मंत्रालय से संबंधित विधेयक को पारित कराने के प्रयास में लगा है। वहीं मंत्रियों और सत्तारूढ़ गठबंधन के सांसदों में भी कई मामलों में एक राय नहीं दिखी।

जेटली ने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सदन के भीतर काफी सक्रिय रहा और उनकी पार्टी संसद के बाहर भी इस सक्रियता को कायम रखेगी।

जेटली ने कहा कि सरकार सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम, (एएफएसपीए) में बदलाव करना चाहती है।

उन्होंने इस कानून में जल्दबाजी में कोई बदलाव करने के खिलाफ सरकार को आगाह करते हुए कहा कि ऐसा करने से सुरक्षा बल प्रभावित होंगे।

सुषमा स्वराज ने कहा कि भाजपा ने मानसून सत्र में मुद्दों के अनुसार तीन विभिन्न तरीके से काम किया।

परमाणु दायित्व विधेयक जैसे मुद्दे पर भाजपा ने पार्टी द्वारा उठाई गई आपत्तियों को दुरुस्त किए जाने के बाद सरकार को सहयोग किया। लेकिन महंगाई के मुद्दे पर भाजपा विपक्षी पार्टियों के साथ खड़ी रही।

स्वराज ने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर के हालत और शत्रु संपत्ति विधेयक जैसे मुद्दों पर भाजपा ने स्वतंत्र रूप से अपना पक्ष रखा। अन्य विपक्षी पार्टियों के रुख इस मुद्दे पर अलग रहे।

राज्यसभा में भाजपा के उपनेता एस.एस.अहलूवालिया और भाजपा महासचिव रविशंकर प्रसाद ने भी संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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