कश्मीर गोलीबारी में किशोर की मौत, अब तक 65 मौतें (राउंडअप)
उधर अलगाववादियों के बंद के आह्वान तथा पांच थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगाए जाने के कारण कश्मीर घाटी में जनजीवन प्रभावित रहा।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "गोली लगने के बाद 11 वर्षीय इरशाद अहमद को श्रीनगर लाया गया और एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन काफी कोशिशों के बाद भी चिकित्सक उसे नहीं बचा पाए।"
उन्होंने बताया, "अनंतनाग शहर में ईदगाह के निकट स्थित शेरबाग पुलिस चौकी पर पथराव कर रहे प्रदर्शनकारियों ने हमला कर दिया। हमला लगातार जारी रहने पर पुलिस एवं केंद्रीय रिजर्व पुलिस (सीआरपीएफ) ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठी चार्ज किया तथा आंसूगैस के गोले दागे।"
अधिकारी ने कहा, "जब भीड़ ने हटने से इंकार कर दिया तब सुरक्षा बलों ने रबर की गोलियां दागीं जिससे एक लड़का जख्मी हो गया। उसे तुरंत श्रीनगर के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया।"
दक्षिणी कश्मीर रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक शफवात अहमद ने आईएएनएस को फोन पर बताया, "इस घटना में तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए और उनमें से एक के चेहरे पर गहरा जख्म हो गया।"
इरशाद की मौत के बाद घाटी में हिंसक घटनाओं में 11 जून से अब तक 65 लोगों की मौत हो चुकी है।
सोमवार को इससे पहले संवेदनशील मैसूमा क्षेत्र में पुलिस की गोलीबारी में पांच लोग घायल हो गए और अलगाववादियों द्वारा प्रायोजित बंद की वजह से शहर का सामान्य जीवन प्रभावित रहा। यह घटना जम्मू एवं कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के अध्यक्ष यासीन मलिक के आवास के निकट हुई।
अस्पताल के सूत्रों के मुताबिक यासिर हामिद शेख नाम के एक युवक को पेट के निचले हिस्से में गोली लगी है और उसकी हालत चिंताजनक बनी हुई है। यासिर जेकेएलएफ प्रमुख का रिश्ते का भाई है।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि कुछ युवक गली में कैरम खेल रहे थे तभी पुलिसकर्मियों ने अकारण गोलीबारी शुरू कर दी।
इस घटना के बाद मैसूमा और उसके आसपास के क्षेत्रों में तनाव फैल गया। गुस्साए युवक सड़कों पर उतर आए और भारत-विरोधी नारे लगाने लगे। युवकों ने लाल चौक इलाके में तैनात सुरक्षाबलों पर पथराव किया और टायर भी जलाए।
एक पुलिस अधिकारी ने यहां बताया, "श्रीनगर के पांच थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू जारी है जबकि बड़गाम और अनंतनाग शहरों में प्रतिबंध लगाया गया है।"
अधिकारियों का कहना है कि कर्फ्यू और अलगाववादियों द्वारा प्रायोजित बंद के बावजूद पिछले कुछ दिनों में कश्मीर घाटी में हिंसा में कमी आई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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