परमाणु विधेयक राज्यसभा में पेश, भाजपा का समर्थन (लीड-1)
विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दोहराया है कि वह राज्यसभा में विधेयक का समर्थन करेगी।
चव्हाण ने कहा, "परमाणु ऊर्जा कोई रामबाण नहीं है, लेकिन यह एक ऐसा विकल्प है, जिसे हम नजरअंदाज नहीं कर सकते।"
ज्ञात हो कि लोकसभा ने 18 संशोधनों के साथ 25 अगस्त को लगभग आमसहमति के साथ विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी थी।
चव्हाण ने सभी राजनीतिक पार्टियों को आम सहमति पर पहुंचने और मूल विधेयक के 18 संशोधनों को मंजूरी देने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, "इन 18 संशोधनों ने विधेयक को मजबूत बनाया है, इसे अधिक शक्तिसंपन्न बनाया है।"
उन्होंने कहा कि परमाणु बिजली पैदा करने वाले 30 देशों में से 28 देशों में परमाणु ऊर्जा से संबंधित कोई न कोई असैन्य दायित्व कानून है। चव्हाण ने कहा, "पाकिस्तान के अलावा हम एक मात्र ऐसे देश हैं, जहां इस तरह का कोई कानून नहीं है।"
परमाणु आपूर्तिकर्ताओं के दायित्व के मुद्दे पर चव्हाण ने कहा कि भारत ने आपूर्तिकर्ताओं पर दायित्व थोपा है। उन्होंने कहा, "हम 28 में से पहले ऐसे देश हैं, जहां हम आपूर्तिकर्ताओं पर कुछ दायित्व थोप रहे हैं। यह आवश्यक है, क्योंकि इस देश ने भोपाल गैस त्रासदी को झेला है।"
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने कहा कि भाजपा विधेयक का समर्थन करेगी, क्योंकि उसकी अधिकांश चिंताए 18 संशोधनों में दूर हो गई हैं।
उद्योग जगत की इस आपत्ति पर कि दायित्व के कारण भारतीय परमाणु उद्योग में आपूर्तिकर्ताओं की रुचि नहीं रहेगी, जेटली ने कहा कि यह सब बाजार के चरित्र पर निर्भर है।
जेटली ने कहा, "यह कोई आपूर्तिकर्ताओं का बाजार नहीं है, यह बाजार खरीदारों का है। बाजार का चरित्र आपूर्तिकर्ताओं को आकर्षित करेगा।"
जेटली ने कहा कि मूल विधेयक आपूर्तिकर्ता प्रतिरक्षा विधेय जैसा अधिक था। क्योंकि उसमें दुर्घटना की स्थिति में आपूर्तिकर्ता के क्षति पहुंचाने के इरादे का संदर्भ था।
जेटली ने कहा, "लेकिन मुद्दा यह है कि भारतीय करदाताओं को किसी दूसरे की गलती का खामियाजा क्यों भुगतना चाहिए। कोई भी आपूर्तिकर्ता क्षति पहुंचाने के इरादे से उपकरण कभी नहीं बनाएगा। इस तरह यह विधेयक एक तरह से दायित्व मुक्त व्यवस्था उपलब्ध कराएगा।"
चव्हाण ने कहा, "हमने विधेयक में प्रमुख विपक्षी दल (भारतीय जनता पार्टी) और वामदलों की चिंताओं का ध्यान रखा है।"
उन्होंने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य परमाणु दुर्घटना होने की स्थिति में पीड़ितों को 'त्वरित' मुआवजा दिलाने का तंत्र विकसित करना है।
उन्होंने कहा, "भाजपा की चिंताओं के मद्देनजर परमाणु हादसे की स्थिति में मुआवजे की राशि 500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1500 करोड़ रुपये कर दी गई है। अमेरिका में भी यही व्यवस्था है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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