उत्तर प्रदेश में बाढ़ का कहर जारी
लगातार तेज बहाव से तटबंध का कटान किलोमीटर तक पहुंच गया है। बाढ़ का पानी तटबंध के निकट के करीब आधा दर्जन और गांवो में प्रवेश कर गया है।
बाराबंकी के अपर जिलाधिकारी (वित्त) देवेंद्र पांडे ने सोमवार को आईएएनएस को बताया कि बाढ़ का पानी अब परसावलपुर गांव से सटे गोंडा जिले के सीमावर्ती गांवों में प्रवेश कर रहा है। प्रभावित गावों के लोगों को मोटरवोट व नावों की मदद से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
पांडे ने कहा कि तटबंध में हो रहे कटान को रोकने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। इससे पहले शनिवार को तटंबध टूटने के कुछ घंटे बाद आस-पास के छह गांव जलमग्न हो गए।
पांडे के मुताबिक तटबंध टूटने से करीब 20,000 लोग प्रभावित हुए हैं। उन्होंने बताया कि रविवार शाम को कमियार गांव में एक बालिका की डूबकर मौत हो गई थी।
अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ प्रभावित लखीमपुर खीरी, बहराइच, बाराबंकी जिलों में अब तक कुल सात मौतें हो चुकी हैं। अब घाघरा और शारदा के जलस्तर में कमी दर्ज की जा रही है।
बहराइच में घाघरा के कहर से पहले करीब 1.50 लाख बेघर हो चुके हैं। महसी और कैसरगंज तहसील के संगवा, समदर, केवलपुर, बांसगढ़ी, अटोडर, देवगंज, पुंगिया, चूली सहित करीब 80 गांव जलमग्न हो गए हैं।
बहराइच के जिला आपदा अधिकारी वीरेंद्र पांडे सोमवार को संवाददाताओं को बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में लगातार प्रांतीय सश्स्त्र बल(पीएसी) की मदद से राहत कार्य जारी है। उन्होंने कहा कि आदमपुर-रेवली तटबंध पर हो रहा कटान पहले की तुलना में कुछ कम हुआ है।
उधर, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, पीलीभीत, गोरखपुर, बस्ती, फरु खाबाद, फैजाबाद जिलों के कई गांवों में घाघरा, शारदा, राप्ती और सरयू का पानी प्रवेश कर गया है। यहां हालात अभी भयावह नहीं हुए हैं।
उत्तराखण्ड स्थित बनबसा बैराज से काफी पानी छोड़े जाने और नेपाली नदियों का जलस्तर बढ़ने से शारदा और घाघरा के जलस्तर में इतनी वृद्धि हुई है।
एटा, मेरठ, बदांयू, कानपुर जिलों में गंगा, मथुरा और आगरा में यमुना और गोरखपुर में राप्ती का जलस्तर भी खतरे के निशान के निकट पहुंच गया है। राज्य के अधिकांश इलाकों में बारिश का दौर जारी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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