अमरीका में विकास दर उम्मीद से कहीं कम

ज़ुबैर अहमद
बीबीसी संवाददाता, वाशिंगटन
अमरीकी अर्थव्यवस्था की विकास दर उम्मीद से कहीं कम कम होने के कारण एक बार फिर विश्व भर में आर्थिक संकट का डर पैदा हो गया है.अमरीका में जारी ताज़े आंकड़ों से पता चलता है की अर्थव्यवस्था की विकास दर 2.4 प्रतिशत से घट कर 1.6 प्रतिशत हो गई है.बैंक क़र्ज़ कम दे रहे हैं और उपभोक्ता ख़रीदारी कम कर रहे हैं. निर्माण के क्षेत्र में काम ठप्प पड़ा है.
दो साल पहले आए आर्थिक संकट से अभी अमरीका उभर ही रहा था की अब यह अटकलें लगाई जा रही हैं की देश एक दूसरे आर्थिक संकट के दरवाज़े पर खड़ा है.अमरीकी प्रशासन ने बैंकों और दूसरी वित्तिय संस्थाओं को अरबों डॉलर की मदद दी थी जिससे आर्थिक संकट से निकलने में मदद हुई थी.
विकास के बढ़ते हुए दर को देखते हुए सरकार ने क़र्ज़ देने का सिलसिला बंद कर दिया था लेकिन अब यह समझ में आ रहा है की अर्थव्यवस्था अब भी अपने पैरों पर खड़ी नहीं हुई है.
हालांकि ब्रिटेन और जर्मनी में आर्थिक विकास के दर से उत्साह मिलता है लेकिन विशेषज्ञों का मानना है की अगर अमरीकी अर्थव्यवस्था संकट में पड़ी तो इसका प्रभाव विश्व भर में एक बार फिर देखने को मिलेगा.
इस ताज़ा स्थिति से जूझने के लिए अमरीकी प्रशासन एक बार फिर निजी वित्तीय संस्थाओं को भारी क़र्ज़ देने की योजना बना रहा है. इसके लिए इसे एक खरब डॉलर की ज़रुरत हो सकती है.अमरीका के केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष बेन बर्नानके ने शुक्रवार को यह घोषणा की कि अगर ज़रुरत पड़ी तो निजी संस्थाओं को और क़र्ज़ दिए जाएंगे ताकि अमरीकी आर्थिक स्थिति मज़बूत हो.
आर्थिक विशेषज्ञ डेविड ब्लान्च्फ़्लोवर कहते हैं, ''कर्ज़ देने की योजना बनाने के अलावा प्रशासन और कुछ कर भी नहीं सकता.''लेकिन क्या इस आर्थिक संकट को दूर किया जा सकेगा?वो कहते हैं, "मुश्किल बात यह है की इससे फ़ायदा नहीं भी हो सकता है पर केंद्रीय बैंक के पास और कोई इलाज भी नहीं है और वो यह क़दम उठाने जा रहा है."
अब देखना यह है की अगले कुछ सप्ताह में कौन सी कंपनियां और कौन से बैंक और दूसरी वित्तिय संस्थाएं आर्थिक संकट का शिकार होता हैं और अमरीकी प्रशासन उनकी मदद किस तरह से करता है.












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