अमरीकी सैनिकों की वापसी की आलोचना

अफ़ग़ानिस्तान

के
राष्ट्रपति
हामिद
करज़ई
ने
जुलाई
2011
से
अमरीकी
सैनिकों
को
अफ़ग़ानिस्तान
से
वापस
बुलाने
पर
अमरीका
की
आलोचना
की
है.
करज़ई
ने
कहा
कि
वापसी
की
तिथि
की
घोषणा
से
तालिबान
के
विद्रोह
को
प्रोत्साहन
मिला
है.
उन्होंने
कहा
कि
जब
तक
तालिबान
पाकिस्तान
में
शरण
लेते
रहेंगे,
यह
युद्ध
जीता
नहीं
जा
सकता
है.

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तालिबान

के
ख़िलाफ़
लड़ाई
में
अमरीका
ने
दिसंबर
2009
के
बाद
से
30,000
से
अधिक
सैनिकों
को
अफ़ग़ानिस्तान
भेजा
है.
करज़ई
ने
यह
बयान
अमरीकी
सांसदों
के
साथ
काबुल
में
एक
बैठक
के
दौरान
दिया.
करज़ई
ने
कहा,
"दशकों
तक
युद्ध
झेलने
के
बाद
देश
के
पुनर्निर्माण
में
मदद
मिली
थी,
लेकिन
नैटो
सैनिकों
की
ओर
से
की
गई
कार्रवाई
में
अफ़ग़ान
लोगों
की
मौत
से
आतंकवाद
के
ख़िलाफ़
युद्ध
में
बाधा
आई
है."

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उन्होंने

इस
बात
की
भी
आलोचना
की
कि
अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान
सीमा
पर
शरण
ले
रहे
आतंकवादियों
को
ख़त्म
करने
में
एकाग्रता
की
कमी
है.
अफ़ग़ानिस्तान
सरकार
ने
बार-बार
मांग
की
है
कि
अमरीका
को
पाकिस्तान
के
ख़िलाफ़
कड़े
क़दम
उठाने
चाहिए.
करज़ई
के
साथ
इस
बैठक
में
शामिल
अमरीकी
सांसद
बॉब
इंगलिस
ने
बताया
कि
पाकिस्तान
के
साथ
लगी
सीमा
से
हो
रहे
हमलों
को
रोकने
में
राष्ट्रपति
करज़ई
ने
और
अधिक
मदद
की
मांग
की
है.
पिछले
साल
हुए
चुनावों
में
चुने
जाने
के
बाद
करज़ई
और
ओबामा
के
बीच
संबंध
कभी-कभार
ही
सामान्य
रहे
हैं.

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