बिहार के 600 से ज्यादा गांवों में बाढ़ के हालात

फिलहाल उत्तरी बिहार में बारिश थमने से प्रमुख नदियों के जलस्तर में कमी आई लेकिन अब भी बाढ़ के पानी से सैकड़ों गांव घिरे हुए हैं। गांवों में पानी घुस जाने के कारण लोग ऊंचाई वाले स्थानों पर जा रहे हैं।
राज्य सरकार राहत और बचाव कार्य की पुख्ता व्यवस्था की बात कह रही है परंतु ग्रामीण इसमें लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं। मुजफ्फरपुर जिले के औराई, कटरा, गायघाट तथा बोचहां प्रखण्डों के करीब 100 गांवों में बाढ़ के पानी ने तबाही मचाई है।
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सूत्रों के अनुसार औराई प्रखण्ड के 40, कटरा प्रखण्ड के 35, गायघाट प्रखण्ड के 15 तथा बोचहां प्रखण्ड के 10 गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। कटरा प्रखण्ड में बागमती और लखनदेई नदी के संगम पर बांध टूट जाने के कारण कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। वहीं गोपालगंज जिले में करीब एक हजार से अधिक घर गंडक नदी की बाढ़ की भेंट चढ़ चुके हैं।
जिले के कुचायकोट प्रखण्ड के दियारा क्षेत्र में रहने वाले लोग बाढ़ के पानी से घिरे हैं। सदर प्रखण्ड के अलावा मांझा, बरौली, सिधवलिया और बैकुंठपुर प्रखण्ड के करीब 48 ग्राम पंचायतों के लोग बाढ़ के पानी में घिरे हुए हैं।
पश्चिम चंपारण की बाल्मिकी व्याघ्र परियोजना में भी बाढ़ का पानी घुस गया है। जिससे वन्यजीवों को भी परेशानी हो रही है। जिले के लौरिया, नरकटियागंज, बगहा प्रखण्डों के कई गांवों से जिला मुख्यालय का संपर्क टूट गया है। बाल्मिकी व्याघ्र परियाजना के वन क्षेत्र पदाधिकारी एम़जे अली ने बताया कि वन्यजीवों को क्षेत्र से बाहर निकलने से रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं।
सुपौल और सहरसा के तटबंधों पर बाढ़ के पानी का दबाव बना हुआ है। सुपौल के जिलाधिकारी आऱ लक्ष्मणन ने बताया कि जिले में अब तक 551 मकान बाढ़ की भेंट चढ़ गए हैं। हालांकि प्रशासन का दावा है कि लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है मगर ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है।












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