'चीन से कड़ा विरोध दर्ज कराया जाए'
ज्ञात हो कि उत्तरी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ बी.एस.जसवाल को एक उच्च स्तरीय आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत चीन दौरे पर जाना था, लेकिन उनके नियंत्रण में जम्मू एवं कश्मीर का क्षेत्र आने के कारण चीन ने उनको वीजा देने से इंकार कर दिया।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, "भारत सरकार और विदेश मंत्रालय को तत्काल अपनी नाराजगी को यथासंभव सख्त अंदाज में चीन से जाहिर कर देना चाहिए। यह भारत का सबसे शर्मनाक तरीके से किया गया अपमान है।"
इस मुद्दे पर सरकार से सख्त कदम उठाने का आग्रह करते हुए पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह ने कहा, "ऐसी स्थिति के बारे में आप नहीं सोच सकते, जहां भारतीय सेना के एक सेवारत और वरिष्ठ अधिकारी को एक ऐसे कार्यक्रम के लिए उचित वीजा देने से इंकार कर दिया, जो कि कोई निजी कार्यक्रम नहीं है। मैं समझता हूं कि भारत सरकार को इस मुद्दे पर बहुत सख्त और पूरी तरह असंदिग्ध रुख अख्तियार करना चाहिए।"
भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने कहा, "चीन का इन सब चीजों से कुछ भी लेना-देना नहीं है और मैं हमेशा से मानता हूं कि भारत सकरकार को इसी तरीके से जवाब देना चाहिए। चीन को एक बहुत ही सख्त संदेश दिया जाए कि भारत इस तरह की हरकतों को बर्दाश्त नहीं करेगा। चीन, भारत के प्रति अभद्र रहा है और भारत को यह अभद्रता नहीं स्वीकारनी चाहिए।"
सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी ने भी चीन की इस कार्रवाई की आलोचना की है और कहा है कि भारत को अपना विरोध जाहिर करना चाहिए।
कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा, "संबंध आपसी आत्मसम्मान पर आगे बढ़ता है। यह एक-दूसरे की चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता पर खड़ा होता है और यदि उस संवेदनशीलता का उल्लंघन हो रहा है और यदि भारत की ओर से जवाब दिया जाता है, तो मैं समझता हूं कि यह वांछित है।"
विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर ने कहा, "मंत्रालय इस मामले को देख रहा है और चीन के साथ सभी बातचीत जारी है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications