नेपाल में मदर टेरेसा के लिए प्रार्थनाएं

काठमांडू, 26 अगस्त (आईएएनएस)। यहां मदर टेरेसा के नाम पर न तो फिल्म समारोहों का, न प्रदर्शनियों का और न ही विशेष रेलगाड़ियों का नाम रखा गया है लेकिन नेपाल में 'मिशनरीज ऑफ चैरिटी' की सिस्टर्स ने अपनी संस्थापक मदर टेरेसा की जन्म शताब्दी पर उनके लिए विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित कर उन्हें याद किया।

काठमांडू में 'मिशनरीज ऑफ चैरिटी' की सिस्टर ब्रिगिटमैन ने कहा, "कोलकाता में हर कोई मदर टेरेसा और उनके घर को जानता है लेकिन नेपाल में उनके कार्यो और इस दिन के महत्व के प्रति बहुत थोड़े से लोग ही जानते हैं।"

उन्होंने कहा, "उनकी जन्म शताब्दी मनाने के लिए नेपाल में कोई विशेष कार्यक्रम नहीं हुए। हम उनकी याद में प्रार्थनाएं कर रहे हैं।"

अल्बानिया में जन्मी मदर टेरेसा ने बाद में भारतीय नागरिकता ले ली थी और कोलकाता में निराश्रितों, बीमारों और अनाथों के बीच काम करने के बाद वह दुनियाभर में प्रसिद्ध हो गई थीं।

एक 77 वर्षीय कैथोलिक पादरी ने बताया कि मदर ने 80 के दशक में कई बार नेपाल यात्रा की थी। मदर टेरेसा ने यहां जिन लोगों से मुलाकात की थी अब उनमें से बहुत थोड़े ही जीवित हैं।

पादरी ने बताया, "तत्कालीन राजा बीरेंद्र और शाही परिवार ने नेपाल के हिंदू देश होने के बावजूद उनका गर्मजोशी से स्वागत किया था।"

कोलकाता की तरह काठमांडू में भी 'मिशनरीज ऑफ चैरिटी' शांति भवन नाम की एक इमारत से अपना कार्य चलाता है।

काठमांडू में नन बुजुर्गो और बीमारों के लिए दो अनाथ आश्रम चलाती हैं। इनमें से एक आश्रम हिंदू मंदिर पशुपतिनाथ के परिसर में है।

कोलकाता की तरह यहां भी अनाथ बच्चों के लिए एक 'शिशु भवन' है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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