अलकायदा के षड्यंत्र में भारतीय के शामिल होने का संदेह
कनाडा की रॉयल कनाडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) ने बुधवार सुबह दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक आरोपी मिसबाहुद्दीन अहमद को कथित रूप से भारतीय बताया जा रहा है। अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है।
कनाडा में 2006 के बाद यह अलकायदा की आतंकवादी साजिश का दूसरा बड़ा खुलासा है। वर्ष 2006 में टोरंटो-18 का खुलासा हुआ था जिसमें टोरंटो के मुस्लिम बहुल इलाके के 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इन लोगों की योजना कनाडा में विस्फोट करने, संसद पर हमला करने और नेताओं को बंधक बनाने के अलावा प्रधानमंत्री की हत्या करने की थी। आरोपियों में से 11 को दोषी ठहराया जा चुका है।
बुधवार को गिरफ्तार किए गए संदिग्ध आतंकवादियों पर आरसीएमपी का राष्ट्रीय सुरक्षा दल निगाह रख रहा था।
अधिकारियों ने कहा कि आतंकियों के इस गिरोह का प्रमुख हथियारों का प्रशिक्षण लेने के लिए पाकिस्तान और अफगानिस्तान की यात्रा कर चुका है। उन्होंने कहा कि यह गिरफ्तारी तब की गई है जब एक संदिग्ध षड्यंत्र से जुड़ा काम करने के लिए विदेश जाने की तैयारी कर रहा था।
पुलिस ने हालांकि संदिग्धों के नाम का खुलासा नहीं किया है लेकिन बताया गया है कि इनमें से एक ओटावा के अस्पताल का एक्स-रे टेक्नॉलाजिस्ट 36 वर्षीय मिसबाहुद्दीन अहमद है। प्रकाशित खबरों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि अहमद भारत से आया है।
अहमद को अपना घर किराए पर देने वाले पूर्व कनाडाई कूटनीतिज्ञ राबर्ट फैरेल ने ओटावा के समाचार पत्र को बताया कि संदिग्ध भारत में जन्मा है लेकिन वह लंबे समय से सऊदी अरब में रह रहा था।
फैरेल ने कहा, "हम मकान किराए पर देने के समय उसकी पत्नी से मिले थे, वह अच्छी महिला दिखी। वह ईरानी पहनावा पहनती थी। वह परंपरागत मुस्लिम परिवारों की तरह ही लगते थे।"
अहमद के घर से पांच किलोमीटर दूर पुलिस ने एक अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार किया। मीडिया में इसका नाम अहमद एहसान बताया गया है।
सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक इन संदिग्धों की साजिश अमेरिका को बिजली उपलब्ध कराने वाले कनाडा के विद्युत संयंत्रों और विद्युत लाइनों को निशाना बनाने की थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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