जूडा हड़ताल : 300 ने दिया इस्तीफा (लीड-1)
भोपाल, 22 अगस्त (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में जूनियर डाक्टर्स एसोसिएशन और सरकार के बीच टकराव चरम पर पहुंच गया है। इस बीच इंदौर के 300 जूनियर डाक्टरों ने इस्तीफा दे दिया है।
प्रदेश सरकार ने हड़तालियों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाते हुए 50 से ज्यादा जूनियर डाक्टरों को निलंबित कर दिया है। इंदौर के 300 जूनियर डाक्टरों ने अपने इस्तीफे अस्पताल अधीक्षक को सौंप दिए हैं। चिकित्सा महाविद्यालय- इंदौर, रीवा, जबलपुर एवं ग्वालियर के जूनियर डाक्टर काम पर लौटने को तैयार नहीं हैं, बल्कि उन्होंने सामूहिक इस्तीफे का निर्णय लिया है।
वहीं ग्वालियर के 198 जूनियर डाक्टरों ने अपने इस्तीफे अस्पताल अधीक्षक कार्यालय के बाहर चस्पा कर दिए हैं। इसके अलावा रीवा एवं जबलपुर के जूडा सोमवार को सामूहिक इस्तीफा देंगे।
प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जूडा की हड़ताल को नाजायज ठहराते हुए स्वास्थ्य विभाग को हड़तालियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि बरसात के मौसम में स्वाइन फ्लू, मलेरिया, डेंगू और वायरल बुखार का खतरा बना हुआ है, इस स्थिति में जूडा का हड़ताल पर जाना औचित्यहीन है।
अधिकारियों के साथ हुई बैठक में चौहान ने हड़ताल की अवधि में जूडा को अनुपस्थित मानते हुए नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
उधर, जूडा और सरकार के टकराव के चलते मरीजों का बुरा हाल हो गया है। भोपाल को छोड़कर शेष चार चिकित्सा महाविद्यालयों से संबद्ध चिकित्सालयों में मरीजों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवाएं न मिलने के कारण बड़ी संख्या में अस्पताल में भर्ती मरीजों ने छुट्टी करा ली है और वे निजी अस्पतालों में पहुंच गए हैं।
जूडा ने अस्पतालों के बाहर हालांकि समानांतर ओपीडी जरूर शुरू कर दी है, मगर इससे मरीजों को राहत नहीं मिल पा रही है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के जूडा अपनी 20 सूत्री मांगों को लेकर 17 अगस्त से बेमियादी हड़ताल पर हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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