उप्र के सैकड़ों गांवों में पानी घुसा (राउंडअप)

नई दिल्ली, 22 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में खतरे के निशान से ऊपर बह रही शारदा और घाघरा नदियों का पानी सैकड़ों गांवों में घुस गया है। प्रदेश के 100 गांवों में अलर्ट घोषित कर दिया गया है। लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए प्रांतीय सशस्त्र बल (पीएसी) को लगाया गया है।

उधर उत्तराखण्ड में भारी बारिश की संभावना के चलते प्रशासन को सचेत कर दिया गया है। दिल्ली में यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया है।

उत्तर प्रदेश में लखीमपुर खीरी, बहराइच, गोंडा, सीतापुर, बस्ती और बाराबंकी जिलों के निचले इलाकों के सैकड़ों गांवों में बाढ़ का पानी भर गया है। उत्तराखण्ड स्थित बनबसा बैराज से करीब पांच लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने और नेपाली नदियों का जलस्तर बढ़ने से शारदा और घाघरा के जलस्तर में उफान आ गया है। बहराइच में खतरे के निशान से 40 सेंटीमीटर ऊपर बह रही घाघरा के पानी से करीब 100 गांव घिर गए हैं।

बहराइच के जिलाधिकारी रिग्जियान सैफिल ने रविवार को संवाददाताओं को बताया कि कैसरगंज और महसी तहसील के जिन गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है, वहां राहत के लिए 20 नावें और 10 मोटरबोट राहत कार्य के लिए लगाई गई हैं।

उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावितों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए प्रांतीय सशस्त्र बल (पीएसी) की एक कंपनी को लगाया गया है। 100 गावों में अलर्ट घोषित कर दिया गया है। सैफिल ने माना कि 80 गावों के करीब पांच हजार लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। बाराबंकी और गोंडा में भी घाघरा नदी से तबाही का संकट मंडरा रहा है।

अपर जिलाधिकारी (वित्त) देवेंद्र पांडे ने आईएएनएस से कहा कि रामनगर तहसील के करीब 20 गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। पीएसी के जवान राहत कार्य में लगे हैं। मोटरबोट व नावों से बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत सामग्री मुहैया कराई जा रही है।

गोंडा की तरबगंज और नवाबगंज तहसीलों के करीब एक दर्जन गांव घाघरा से प्रभावित हुए हैं। यहां घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान से 50 सेंटीमीटर ऊपर है। लखीमपुर खीरी के अपर जिलाधिकारी (वित्त) तुलसी राम ने आईएएनएस को बताया कि पलिया और निघासन तहसील के करीब 20 गांवों में नदी का पानी प्रवेश कर गया है।

उधर, फरु खाबाद में गंगा, गोरखपुर और सिद्धार्थनगर में राप्ती, बस्ती में घाघरा और पीलीभीत में शारदा का जलस्तर लोगों की चिंता बढ़ा रहा है।

दिल्ली में यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बने रहने की वजह से रविवार को उससे सटे निचले इलाकों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया। हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से पानी छोड़े जाने की वजह से यमुना का जलस्तर खतरे से 22 सेंटीमीटर ऊपर 205.05 मीटर बना हुआ है।

सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के मुख्य अभियंता वी.पी.एस. तोमर ने आईएएनएस को बताया, "जलभराव के क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश के बाद रविवार सुबह आठ बजे तक हथिनीकुंड बैराज से करीब 34,600 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।"

यमुना का जलस्तर शुक्रवार रात खतरे के निशान 204.8 मीटर को पार कर गया। उन्होंने कहा कि करीब 150 तकनीकी कर्मचारी यमुना के जलस्तर पर नजर रखे हुए हैं। करीब 63 नौकाएं और गोताखोर तथा आपदा प्रबंधन बल का दल यमुना तट के समीप तैनात हैं।

उत्तराखण्ड में कहीं तेज और कहीं धीमी बारिश का दौर जारी है। मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के दक्षिणी हिस्से में अगले 24 घंटों के दौरान भारी बारिश की संभावना के चलते प्रशासन को अलर्ट कर दिया है। लगातार बारिश के कारण हरिद्वार में गंगा नदी में पानी का स्तर खतरे के निशान के पास पहुंच गया है।

पंजाब में भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) ने रविवार को भाकड़ा बांध से सतलुज नदी में और पानी छोड़ दिया हालांकि इससे राज्य में बाढ़ का कोई खतरा नहीं है।

पंजाब के प्रमुख अभियंता (सिंचाई) अमरजीत सिंह दौलत ने आईएएनएस को बताया, "बीबीएमबी ने 50,000 क्यूसेक पानी शनिवार को छोड़ा था। रविवार सुबह 6,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, लेकिन स्थिति नियंत्रण में है। राज्य के सभी जिले सुरक्षित हैं। बाढ़ का कोई खतरा नहीं है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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