बच्चों की मौत के मामले में जांच शुरू
लखनऊ के मुख्य चिकित्साधिकारी ए. के. शुक्ला ने रविवार को यहां संवाददाताओं को बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का चार सदस्यीय दल आज शाम करीब चार-पांच बजे लखनऊ पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि यह दल घटनास्थल (प्रभावित गांवों) का दौरा करके मामले की पड़ताल करेगा।
शनिवार को समयबद्ध टीकाकरण के बाद मोहनलालगंज क्षेत्र के बिंदौना, पदमनखेड़ा और रामपुर गढ़ी गांव के छह से नौ वर्ष उम्र के चार बच्चों की मौत हो गई थी। मौत के शिकार दो बच्चे बिंदौना तथा एक पदमनखेड़ा और दूसरा रामपुर गढ़ी गांव के रहने वाले थे।
छत्रपति साहू जी महाराज चिकित्सा विश्विद्यालय (सीएसएमएमयू) के बाल रोग विभाग को इस मामले को सौंपने के साथ ही इसकी मजिस्ट्रटी जांच के आदेश शनिवार को ही दे दिए गए थे। राज्य के परिवार-कल्याण विभाग के महानिदेशक एस. पी. राम ने कहा कि जांच र्पिोट आने तक टीकाकरण रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
इससे पहले, शासन ने देर रात प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर मोहनलालगंज सामुदायिक केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक के. एस. त्रिवेदी सहित छह स्वास्थ्यकर्मियों को निलंबित कर दिया। निलंबित अधिकारियों के खिलाफ मोहनलालगंज थाने में गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है।
जिलाधिकारी अनिल कुमार सागर ने शनिवार को आईएएनएस को बताया था, "शनिवार को खसरा, क्षयरोग और विटामिन-ए के टीके लगाए जाने के कुछ ही देर बाद बच्चे बीमार होने लगे। मौत के शिकार हुए बच्चों (दो लड़कियां और दो लड़के) की पहचान रेखा, तान्या, सत्यम और साहिल के रूप में की गई है। ये बच्चे अत्यंत गरीब परिवार के थे।"
उन्होंने बताया कि टीकाकरण अभियान में इस्तेमाल की गई दवाओं की शीशी जब्त कर ली गई है और रासायनिक विश्लेषण के लिए भेज दी गई है।
ग्रामीणों को संदेह है कि बच्चों को पिलाई गई विटामिन-ए की बूंदें मौतों का कारण बनीं। जिला परियोजना अधिकारी विनोद कुमार ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा कि किन वजहों से मौतें हुईं।
उल्लेखनीय है कि लखनऊ में चार वर्ष पहले चलाए गए राष्ट्रीय अंधता निवारण अभियान के दौरान भी विटामिन-ए की बूंदें पीने से दो की मौत हो गई थी और कई बच्चे बीमार हो गए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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