मनमोहन-दलाई लामा की मुलाकात का बचाव

विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा ने संवाददाताओं से कहा, "इस मुद्दे पर भारत का रुख कई बार स्पष्ट किया जा चुका है। यह पूरी तरह स्पष्ट है। दलाई लामा भारत में एक सम्मानित अतिथि के रूप में हैं, वह एक आध्यात्मिक गुरु हैं और लाखों भारतीय उनका इस रूप में सम्मान करते हैं।"

कृष्णा ने कहा, "हम, दोनों देशों के बीच रिश्ते से संबंधित राजनीतिक गतिविधियों में किसी भी व्यक्ति को प्रवेश करने की अनुमति नहीं देंगे।"

उन्होंने कहा, "तिब्बती स्वायत्तशासी क्षेत्र चीनी गणराज्य का हिस्सा है। मैं समझता हूं कि इस मामले में किसी विवाद का पटाक्षेप कर दिया जाना चाहिए।"

ज्ञात हो कि दलाई लामा ने 11 अगस्त को मनमोहन सिंह से मुलाकात की थी। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के वापस सत्ता में आने के बाद दोनों के बीच यह पहली मुलाकात थी।

चीनी सरकार ने इस तरह की राजनयिक मुलाकात पर बार-बार आपत्ति खड़ी की है।

दलाई लामा एक निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रमुख हैं, जिसका मुख्यालय धर्मशाला में स्थित है। वह 1959 में तिब्बत में हुए कम्युनिस्ट विरोधी विद्रोह के बाद भारत आ गए थे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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