परमाणु दायित्व बिल के मसौदे को मंजूरी

भारत में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को विवादास्पद परमाणु दायित्व विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी .
मंज़ूरी से पहले विपक्षी दलों के ज़रिए उठाए गए मुद्दों का भी ख़्याल रखने की कोशिश की गई.
इससे अब संसद के मौजूदा सत्र में ही इस विधेयक के पारित हो जाने का रास्ता साफ हो गया है लेकिन अभी ये तय नहीं है कि इसे संसद में कब पेश किया जाएगा.
इस विधेयक के क़ानून बन जाने के बाद किसी भी असैन्य परमाणु संयंत्र में दुर्घटना होने की स्थिति में संयंत्र के संचालक का उत्तरदायित्व तय किया जा सकेगा और दुर्घटना से प्रभावित लोगों को मुआवज़ा मिल सकेगा.
शुक्रवार सुबह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में दो उपबंधों को जोड़ने के लिए अंतिम समय में इस्तेमाल ‘एंड’ शब्द को वामदलों और भाजपा की आपत्ति के बाद निकाल देने का फ़ैसला किया गया.
विधेयक पर आम सहमति बनाने की कोशिशों को तब झटका लगा जब वाम दलों ने ‘एंड’ का ज़िक्र होने के मुद्दे पर सरकार की आलोचना की थी.
वाम दलों का कहना है कि दो उपबंधों के बीच शब्द ‘एंड’ का ज़िक्र होने से हादसा होने की स्थिति में परमाणु उपकरण के विदेशी आपूर्तिकर्ताओं का दायित्व कुछ कम हो जाता है.
एक विवाद मुआवज़े की राशि को लेकर भी था. पहले इसके लिए विधेयक में संचालक को अधिकतम 500 करोड़ रुपयों का मुआवज़ा देने का प्रावधान था लेकिन भाजपा की आपत्ति के बाद सरकार ने इसे तीन गुना करके 1500 करोड़ रुपए करने को मंज़ूरी दे दी है.
सरकार ने कहा है कि वह समय समय पर इस राशि की समीक्षा करेगी और इस तरह से मुआवज़े की कोई अधिकतम सीमा स्थाई रुप से तय नहीं होगी.
सूत्रों ने बताया कि इन संशोधनों में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि ऑपरेटर अपनी सहायता करने (रिकोर्स) के अधिकार की तब तक मांग नहीं कर सकता, जब तक कि परमाणु हादसे के बाद पीड़ितों के दावों की पूरी क्षतिपूर्ति नहीं कर दी जाती.
कैबिनेट ने इस विधेयक का जो मसौदा मंज़ूर किया है उसमें संसदीय स्थाई समिति की ओर से संसद में दो दिन पहले पेश रिपोर्ट की लगभग सभी सिफारिशों को शामिल कर लिया गया है.
इस विधेयक पर विपक्षी दलों ने कई आपत्तियाँ दर्ज की थीं जिसके बाद इसे सरकार ने टाल दिया था और इसे संसद की स्थाई समिति को भेज दिया गया था.












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