कश्मीर में सिखों की सुरक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध : प्रणब
नई दिल्ली, 20 अगस्त (आईएएनएस)। सरकार ने शुक्रवार को कहा कि वह कश्मीर घाटी में अल्पसंख्यक सिखों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। वहां कुछ सिख परिवारों को गुमनाम पत्र भेजकर आतंकवादियों ने इस्लाम स्वीकार करने या घाटी छोड़ने की धमकी दी है।
इस मामले पर लोकसभा में हंगामे के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा, "सरकार को इस मामले की पूरी जानकारी है। न केवल घाटी के मुसलमान वरन पूरा भारत सिखों की रक्षा के लिए उठ खड़ा होगा। धमकी देने वाले आतंकवादियों की संख्या बहुत कम है और मैं आश्वस्त करता हूं कि उनके साथ कोई भी नहीं है।"
लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू होते ही शिरोमणि अकाली दल के रतन सिंह अजनाला ने इस मुद्दे को उठाया।
अजनाला ने उन मीडिया खबरों का हवाला दिया जिनमें कहा गया है कि घाटी में नागरिकों की मौतों के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों में हिस्सा नहीं लेने पर सिखों को धमकाया जा रहा है।
उन्होंने कहा, " सिखों ने भारत-पाकिस्तान युद्धों में सबसे अधिक बलिदान दिया है और उसके बदले में हमारे साथ ऐसा व्यवहार हो रहा है।"
नेशनल कांफ्रेंस के महबूब बेग ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि पूरी कश्मीर घाटी के मुस्लिम सिख भाइयों के साथ हैं और किसी भी कीमत पर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
बेग ने कहा, "इस खबर को पढ़ने के बाद मुझे भी आप जैसी तकलीफ हुई। हर कश्मीरी मुसलमान इसके खिलाफ लड़ेगा। घाटी में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए यह कुछ आतंकवादी तत्वों का षड्यंत्र है।"
घाटी में 1990 के दशक में पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के उभरने पर वहां से हिंदुओं के पलायन के बाद सिख समुदाय ही वहां का सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय है। घाटी में 60,000 सिख हैं।
सर्वदलीय सिख समन्वय समिति (एएससीसी) ने आरोप लगाया कि कई सिखों को धमकी भरे पत्र मिले हैं।
हुर्रियत के कट्टरवादी धड़े के नेता सैयद अली शाह गिलानी ने सिखों से कहा है कि उनको इन फर्जी पत्रों से भयभीत और उपेक्षित नहीं महसूस करना चाहिए।
उन्होंने आश्वस्त किया कि किसी भी सिख को विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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