चेहरे से नक़ाब हटाएँ: ऑस्ट्रेलियाई अदालत

लेकिन बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि जूरी उस महिला के चेहरे के भावों को देखकर उसकी बातों की विश्वसनीयता का अंदाज़ लगाएगी. उनकी दलील थी कि यहाँ तक कि इस्लामी अदालतों में भी महिलाएँ बिना चेहरा ढके पेश होती हैं. जज शॉना डीने ने कहा कि महिलाओं को चेहेरे से नक़ाब हटानी चाहिए, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वो ऐसा फ़ैसला नहीं सुना रही हैं जो क़ानूनी रूप से मिसाल बन जाए. उनका कहना था कि ये मौजूदा परिस्थितियों में किया गया फ़ैसला है.
जज ने इस बारे में अन्य फ़ैसलों से तुलना किए जाने को ठुकरा दिया और कहा कि वे कोई मायने नहीं रखतीं हैं क्योंकि ये ऑस्ट्रेलिया है, कोई इस्लामी अदालत नहीं है. गवाह देने वाली महिला पिछले सात वर्षों से ऑस्ट्रेलिया में रह रही है और वो 17 वर्ष की आयु से ही बुर्क़ा पहनती आई है. महिला का कहना था कि वो अपने परिवार के लोगों के सामने और नजदीकी पुरुष रिश्तेदारों के सामने ही बुर्क़ा हटाती हैं.












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