मध्य प्रदेश में जूनियर डॉक्टर्स की हड़ताल पर संशय
भोपाल। मध्य प्रदेश में हड़ताल वापस लेने के मुद्दे पर जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन में दो फाड़ हो गया है। भोपाल को छोड़कर शेष चिकित्सा महाविद्यालय के जूडा ने काम पर लौटने से इंकार कर दिया और हड़ताल जारी है। सरकार की ओर से यह कहा गया कि प्रदेश के सभी जूडा काम पर लौटने के लिए राजी हो गए हैं। वहीं जूडा के प्रदेशाध्यक्ष विक्रांत भूरिया का कहना है कि सरकार ने साजिश रच कर जूडा को कमजोर करने की कोशिश की है।
भूरिया ने कहा कि वे अपनी मांगों के पूरा होने से पहले काम पर नहीं लौटेंगे। स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने एक कमरे में बैठकर भोपाल के कुछ पदाधिकारियों से समझौता किया है। इससे जूडा का कोई लेना देना नहीं है। भूरिया ने बताया कि अपने साथियों से धोखा करने वाले डा. योगेंद्र को पद से हटा दिया गया है। वहीं इंदौर, जबलपुर, रीवा और ग्वालियर के जूडा अब भी हड़ताल पर हैं। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि भोपाल में जो वार्ता हुई उसमें सेंट्रल जूडा का कोई पदाधिकारी नहीं था। उन्होंने घोषणा की है कि मांग पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी। आधिकारिक तौर पर दी गई जानकारी के मुताबिक भोपाल में हुई समझौता वार्ता के वक्त संचालक चिकित्सा शिक्षा वीके सैनी, भोपाल मेडिकल कालेज के डीन योगेंद्र वर्मा और जूडा की भोपाल इकाई के अध्यक्ष योगेश तौर, साजिद व अवधेश दिवाकर मौजूद थे।
इस हड़ताल को खत्म कराने के लिए स्वास्थ्य राज्यमंत्री महेंद्र हार्डिया ने भोपाल की जूडा इकाई से वार्ता की और मांगें पूरी कराने की पहल का आश्वासन देकर हड़ताल वापस लेने के लिए राजी कर लिया। इससे पहले राज्य सरकार ने हड़ताल को अवैध करार देकर अत्यावश्यक सेवा प्रतिरक्षण अधिनियम (एस्मा) लागू कर दिया। एस्मा लागू किए जाने के बाद भी जब जूडा काम पर नहीं लौटे तो सरकार की ओर से बातचीत की पहल की गई।
मालूम हो कि भोपाल में शनिवार को पुलिस वैन से कुचलकर मारे गए दो चिकित्सा छात्रों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये का मुआवजा देने सहित अन्य मांगों को लेकर प्रदेश के पांच चिकित्सा महाविद्यालय के जूनियर डॉक्टर व चिकित्सा छात्र बेमियादी हड़ताल पर हैं। इसके चलते चिकित्सा महाविद्यालयों से संबद्घ चिकित्सालयों में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं।












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