चीनी युद्ध दस्तावेज जारी करने से इन्कार : नैयर
नई दिल्ली, 19 अगस्त (आईएएनएस)। प्रसिद्ध पत्रकार एवं ब्रिटेन में भारत के राजदूत रहे कुलदीप नैयर ने कहा है कि सरकार युद्ध के दस्तावेज के बारे में बात करने से इंकार कर 1962 में हुए चीन-भारत युद्ध में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की भूमिका के विषय में जानकारी छिपाने का प्रयास कर रही है।
नैयर ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत तीन वर्ष पहले आवेदन देकर 1962 के युद्ध से संबंधित वर्गीकृत दस्तावेज के बारे में जानकारी मांगी थी, जिसमें कहा गया था कि युद्ध के दौरान नई दिल्ली को नीचा दिखाया गया तथा चीन के कब्जे के कारण भारत को 38,000 वर्ग किलोमीटर भूमि की क्षति उठानी पड़ी।
छह माह पहले नैयर ने कहा था कि केंद्रीय सूचना आयोग ने यह कहते हुए उनका आग्रह ठुकरा दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से दस्तावेज को जाहिर नहीं किया जा सकता। अब उन्होंने यह अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज हासिल करने के लिए उच्च न्यायालय की शरण ली है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि युद्ध में भारत की कारारी हार के लिए कौन जिम्मेदार था।
नैयर ने आईएएनएस को बताया, "मुझ से कहा गया कि सेना का रण-कौशल प्रकट नहीं किया जा सकता। लेकिन युद्ध के लगभग पांच दशकों बाद रण-कौशल के बारे में जानकारी देने में इतनी संवेदनशीलता क्यों दिखाई जा रही है?" उन्होंने कहा कि इसका अर्थ है कि रण-कौशल में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है।
नैयर ने कहा, "युद्ध गुजरने के बाद नेहरू को काफी आलोचना झेलनी पड़ी थी। मुझे शक है कि वे दस्तावेज को इसलिए जाहिर नहीं करना चाहते, क्योंकि वे नहीं चाहते कि नेहरू के नेतृत्व पर सवाल उठे।"
सरकार नैयर के दूसरे आवेदन पर भी चुप्पी साधे बैठी हुई है जिसमें 1965 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद तत्कालीन पाकिस्तानी विदेश मंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो एवं उनके भारतीय समकक्ष स्वर्ण सिंह के बीच हुई वार्ता से संबंधित दस्तावेज मांगे गए हैं।
नैयर ने कहा कि सूचना आयोग ने सरकार को आवेदनों पर विचार करने को कहा है, लेकिन कुछ नहीं किया गया।
यह पूछे जाने पर कि वह ये दस्तावेज क्यों हासिल करना चाहते हैं, नैयर ने कहा कि 1965 के युद्ध के बाद कश्मीर मुद्दे का हल निकालने के लिए ब्रिटेन और अमेरिका का भारत पर काफी दबाव है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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