परमाणु विधेयक : मुआवजे की राशि 1,500 करोड़ रुपये, आपूर्तिकर्ता भी जवाबदेह (राउंडअप)
मुंबई, 18 अगस्त (आईएएनएस)। विवादित परमाणु दायित्व विधेयक में कुछ बदलावों की सिफारिश के साथ संसद की एक स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट बुधवार को संसद में पेश कर दी। समिति ने दुर्घटना की स्थिति में मुआवजे की सीमा 500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,500 करोड़ रुपये करने तथा परमाणु उपकरणों को दोषयुक्त पाए जाने की स्थिति में आपूर्तिकर्ताओं को जवाबदेह ठहराए जाने की सिफारिश की है।
इस विधेयक में प्रस्तावित बदलावों ने परमाणु दायित्व क्षतिपूर्ति विधेयक, 2010 के मौजूदा मानसून सत्र में पारित होने की संभावना बढ़ा दी है। मानसून सत्र 31 अगस्त को समाप्त हो रहा है।
सरकार अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के नवंबर महीने में प्रस्तावित भारत दौरे के दौरान उनके समक्ष इस विधेयक को पारित अवस्था में रखने को उत्सुक है। क्योंकि 2008 में हुए भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के क्रियान्वयन की यह एक पूर्व शर्त है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर 31 सदस्यीय संसद की स्थायी समिति ने बुधवार को भारी हंगामे के बीच दोनों सदनों में अपनी रिपोर्ट पेश की। इस बीच कुछ विपक्षी पार्टियों ने सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच सौदेबाजी होने का आरोप लगाया है।
बजट सत्र के दौरान सात मई को संसद में पेश किए जाने के बाद इस विधेयक को स्थायी समिति के पास भेज दिया गया था।
रिपोर्ट में परमाणु दुर्घटना की स्थिति में मुआवजे की राशि 500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,500 करोड़ रुपये करने की सिफारिश की गई है। ऐसा मुद्रास्फीति और भारतीय मुद्रा की क्रय शक्ति को देखकर किया गया।
समिति ने यह भी सिफारिश की है कि सरकार मुआवजे की सीमा बढ़ा सकती है, लेकिन किसी भी स्थिति में उसमें कमी नहीं होनी चाहिए।
रिपोर्ट में देश में परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र से निजी क्षेत्र को अलग रखने को कहा गया है। इस तरह अब परमाणु बिजली संयंत्रों के विस्तार का काम सरकार या सरकारी कंपनियों के हाथ में होगा।
विपक्षी भाजपा की एक और मांग को स्वीकार करते हुए समिति ने मुआवजे के लिए दावा करने की समय सीमा 10 वर्ष से बढ़ाकर 20 वर्ष कर दी क्योंकि विकिरण का प्रभाव सामने आने में काफी अधिक समय लगता है।
बहरहाल, आपूर्तिकर्ताओं की जवाबदेही को जोड़ने से सरकार को भाजपा का समर्थन हासिल करने में मदद मिली है।
समिति ने आपूर्तिकर्ताओं के साथ समझौते में उपयुक्त प्रावधान के द्वारा संचालक के हितों को सुरक्षित करने को कहा है।
समिति ने व्यक्ति पर तात्कालिक और दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभाव और मौत तथा व्यक्तिगत चोट को तथा साथ ही 'पर्यावरण' शब्द को भी शामिल कर परमाणु दुर्घटना से होने वाली क्षति की व्याख्या को विस्तृत करने का सुझाव दिया है।
रिपोर्ट में परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र से निजी कंपनियों को दूर रखने की सिफारिश की गई है। इसका अर्थ हुआ कि या तो सरकार या सरकारी कंपनियां ही देश में परमाणु संयंत्रों का संचालन कर सकती हैं।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि आपूर्तिकर्ता पर दावा करने के संचालक के अधिकार से संबंधित एक लिखित करार दोनों के बीच होना चाहिए। समिति ने कहा कि संचालक को पहले पीड़ितों को मुआवजा देना चाहिए और उसके बाद आपूर्तिकर्ता के साथ जवाबदेही के मसले का निपटारा करना चाहिए।
संवाददाताओं से बातचीत में समिति के अध्यक्ष, कांग्रेस सांसद, टी.सुब्बारामी रेड्डी ने कहा कि विधेयक का मुख्य मुद्दा किसी परमाणु दुर्घटना की स्थिति में पीड़ितों को उपयुक्त मुआवजे के भुगतान की प्रक्रिया मुहैया कराना था।
समिति के सुझावों को स्वीकार किए जाने की स्थिति में मुख्य विपक्षी दल, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने संबंधित विधेयक का समर्थन करने की बात कही है।
कुछ विपक्षी सांसदों ने कहा कि सोहराबुद्दीन शेख हत्या मामले में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दिए जाने के लिए सत्तारूढ़ कांग्रेस से सौदा हो जाने के कारण भाजपा विधेयक का समर्थन करने को तैयार हुई है।
समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव ने कहा, "उन्होंने सौदा कर लिया है और सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ कांड की सीबीआई जांच से मोदी को बाहर कर दिया गया है।"
राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने कहा कि गैर संप्रग (संयुक्त प्रगतिशली गठबंधन) और गैर राजग (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) पार्टियां इस मुद्दे को संसद में उठाएंगी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और भाजपा ने हाथ मिला लिया है। उन्होंने सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले में नरम होने का फैसला किया और भाजपा ने विधेयक का समर्थन किया।
इस विवादास्पद विधेयक पर भाजपा और कांग्रेस का गतिरोध अब समाप्त हो चुका है। भाजपा ने कहा कि मुआवजे की रकम बढ़ाने और निजी क्षेत्र को प्रवेश की अनुमति नहीं होने से देश के हितों की सुरक्षा होगी।
संसद के बाहर भाजपा प्रवक्त रविशंकर प्रसाद ने आईएएनएस से कहा, "हम यही तो चाहते थे। देश के हितों को सुरक्षित रखने की आवश्यकता है और यह केवल सरकार पर भाजपा के दबाव के बाद हुआ है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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