पतंजलि के काम का अरबी में अनुवाद

अबू धाबी, 18 अगस्त (आईएएनएस)। योग के संस्थापक और भारत के 1,500 वर्ष पुराने महान दार्शनिकों में से एक पतंजलि के काम का अरबी भाषा में अनुवाद किया गया है।

समाचार एजेंसी डब्ल्यूएएम के मुताबिक यमन के साना विश्वविद्यालय में भाषा संकाय में अनुवाद विषय के प्रोफेसर अब्दुल वहाब अल मकालेह ने पतंजलि के संस्कृत में लिखे गए कार्यो का 'कलीमा' नाम से अरबी अनुवाद पेश किया है। अबू धाबी संस्कृति एवं विरासत प्राधिकरण (एडीएसीएच) ने इस परियोजना को संचालित किया था।

किताब में चार अध्यायों में 195 कहावतें हैं। ये चार अध्याय हैं, योग और उसका उद्देश्य, योग और उसका अभ्यास, शक्तियां और मुक्ति। योग ध्यान के अभ्यास के लिए इसे एक महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि योग से स्वास्थ्य संबंधी कई लाभ होते हैं।

पतंजलि की मूल किताब संस्कृत में है। इसका सबसे पहले अंग्रेजी में 'हाउ टू नो गॉड : योग एफोरिज्म्स ऑफ पतंजलि' शीर्षक से अनुवाद किया गया था। स्वामी प्रभावनंदा और क्रिस्टोफर इशरवुड ने यह अनुवाद किया था।

इशरवुड इससे पहले 'भगवद-गीता : द सांग ऑफ गॉड' और 'शंकराज क्रेस्ट ज्वेल ऑफ डिस्क्रिमिनेशन' के अनुवाद के समय प्रभावनंदा के साथ काम कर चुके थे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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