भारत को न्यूयार्क में संपत्ति कर विवाद में जीत
मैनहट्टन में संघीय अपीलीय अदालत ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र में दूतावास रखने के लिए भारत को 4.25 करोड़ डॉलर और मंगोलिया को 43 लाख डॉलर के बकाया करों और ब्याज से मुक्त कर दिया।
तीन न्यायाधीशों के पैनल ने जून 2009 मे विदेश विभाग के उस फैसले पर मुहर लगा दी जिसमें राजनयिक कर्मचारियों के आवासों को एक वर्ष में 70 लाख डॉलर तक के संपत्ति कर से छूट है।
फॉरेन मिशन एक्ट के तहत विदेश विभाग को दूतावासों को कर छूट देने, बकाया करों और नगरपालिका करों से मुक्ति देने का अधिकार है।
भारत और मंगोलिया की ओर से वकील एरोन स्टीएफेल ने कहा, "निश्वित तौर पर परिणाम से रोमांच हुआ है। यह पूर्ण विजय है। हम जो चाहते थे वह सब कुछ हमें मिला।"
भारत और मंगोलिया उन कई देशों में शामिल थे जिन पर सामूहिक रूप से न्यूयार्क में 26 करोड़ डॉलर का संपत्ति कर बकाया है। अपीलीय अदालत के फैसले से वर्ष 2008 में दिया गया एक निचली अदालत का फैसला अप्रभावी हो गया, जिसमें मैनहट्टन में एक 26 मंजिला इमारत के संबंध में भारत को 4.25 करोड़ डॉलर के संपत्ति कर का बकाएदार ठहराया गया था। इस इमारत की 20 मंजिलों पर राजनयिकों के आवास हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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