लोकसभा में किसान आंदोलन के मसले पर चर्चा
इस मसले परे सोमवार को हुए हंगामे के मद्देनजर लोकसभाध्यक्ष मीरा कुमार ने मंगलवार को सदस्यों को अपनी राय रखने की इजाजत दी। समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता मुलायम सिंह यदव ने कहा, "किसानों की हत्याएं की गईं। यह बहुत ही गंभीर मामला है। पता चला है कि इस मामले में अब तक आधिकारिक तौर पर रिपोर्ट नहीं दर्ज की गई है। मेरा सवाल यही है कि आखिर रिपोर्ट क्यों नहीं दर्ज की गई?"
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह ने कहा, "किसानों की जमीन जबरन अधिग्रहित की जा रही है। मैं मांग करता हूं कि भूमि अधिग्रहण से जुड़े विधेयक को सदन में जल्द पेश किया जाए। किसानों की जमीन का अधिग्रहण उनकी मर्जी के बिना नहीं किया जा सकता।"
जनता दल (युनाइटेड) के शरद यादव ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है कि जिस दिन पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा था उसी दिन अलीगढ़ और मथुरा के किसानों पर गोलियां बरसाईं जा रही थीं। उन्होंने कहा कि किसानों को हर हाल में उचित मुआवजा मिलना चाहिए।
राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के जयंत चौधरी ने कहा कि किसानों पर गोलियां चलाने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण के मसले पर राष्ट्रीय सहमति बननी चाहिए ताकि बार-बार इस तरह की स्थिति न पैदा हो।
विपक्षी दलों के हमले के बीच बसपा के नेता दारा सिंह चौहान ने इस पूरे मामले पर मायावती सरकार का बचाव किया। उन्होंने कहा, "इस घटना में मारे गए किसानों के परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदना है। मैं कहना चाहता हूं कि किसानों और सरकार के बीच समझौता हो गया है। गोलीबारी की घटना में सभी कानूनी कार्रवाई पूरी की गई है। इस मामले में रिपोर्ट भी दर्ज की गई है।"
इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार देर रात मारे गए किसानों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये और घायल किसानों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की सहायता राशि का ऐलान किया। इसके साथ ही किसान नेता रामबाबू कथीरिया और कुछ अन्य नेताओं को रिहा कर दिया गया। सरकार ने जमीन के अधिग्रहण के लिए भी मुआवजे की दर बढ़ाने का फैसला किया है।
गौरतलब है कि अलीगढ़ में शनिवार देर रात किसानों और पुलिस के बीच हुए संघर्ष में एक पुलिसकर्मी सहित दो लोगों की मौत हो गई थी और 10 से अधिक लोग घायल हो गए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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