सांसदों के वेतन में हो सकती है 300 प्रतिशत की वृद्धि (राउंडअप)

नई दिल्ली, 17 अगस्त (आईएएनएस)। सरकार ने मंगलवार को कहा कि वह सांसदों के वेतन में 300 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने के लिए संसद के मौजूदा सत्र में एक विधेयक लाने की कोशिश कर रही है। हालांकि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद के नेतृत्व में कई पार्टियों के सदस्यों ने इस मुद्दे पर लोकसभा की कार्यवाही स्थगित करने के लिए मजबूर कर दिया।

दूसरी ओर मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सांसदों द्वारा खुद से अपना वेतन तय किए जाने का विरोध किया।

केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने लोकसभा में कहा, "सरकार सांसदों की वेतन वृद्धि के लिए विधेयक यथा संभव जल्द से जल्द पेश करने के लिए तैयार है।"

मुखर्जी ने कहा कि वेतन वृद्धि विधेयक के जरिए किया जाना है। उन्होंने कहा, "सांसद वेतन-भत्ता अधिनियम, 1954 में संशोधन के लिए एक विधेयक पेश करना है। हम इसी सत्र में इस विधेयक को लाने की कोशिश कर रहे हैं।"

मुखर्जी ने कहा कि विधेयक केंद्रीय कैबिनेट में मंजूरी के बाद संसद में पेश किया जाएगा। सोमवार को कैबिनेट ने इस मामले पर निर्णय टाल दिया था।

इस मुद्दे पर संसद की कार्यवाही दोपहर में दो घंटे तक स्थगित रहने के बाद मुखर्जी ने कहा, "हम इस मुद्दे की संवेदनशीलता से पूरी तरह वाकिफ हैं।"

इससे पहले सरकार द्वारा सांसदों की वेतन वृद्धि का फैसला टाले जाने को लेकर लालू प्रसाद यादव ने विरोध किया और हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही दो घंटे के लिए स्थगित की गई।

शून्य काल शुरू होते ही लालू प्रसाद ने सांसदों की वेतन वृद्धि का फैसला टाले जाने का विरोध किया।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव, बहुजन समाज पार्टी, शिव सेना और तृणमूल कांग्रेस ने भी राजद अध्यक्ष का साथ दिया।

लालू प्रसाद यादव की इस मांग के समर्थन में कांग्रेस के कुछ सांसद भी खड़े हुए।

लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने सदन को दो बजे तक के लिए स्थगित करने से पहले सदस्यों को शांत करने का भरपूर प्रयास किया।

वामपंथी पार्टी के सांसद हालांकि इस विरोध से दूर रहे। क्योंकि कम्युनिस्ट पार्टियों ने संसद द्वारा इस तरह का कोई कदम उठाए जाने का विरोध किया है, जिसमें खुद से सदस्यों का वेतन-भत्ता तय किया जाए। वाम दलों का कहना है कि इस मुद्दे पर एक स्वतंत्र आयोग का गठन किया जाना चाहिए।

भाजपा के सदस्य हालांकि इस दौरान मंगलवार को सदन में शांत रहे। लेकिन प्रदर्शनरत सांसदों ने उनसे भी साथ आने का आह्वान किया।

माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2006 में सांसदों की वेतन वृद्धि का फैसला लेने के लिए अलग तंत्र स्थापित करने का वादा किया था। लेकिन इस पर अब तक कोई फैसला नहीं लिया गया है।

येचुरी ने कहा, "माकपा इस बात का विरोध करती है कि सांसद स्वयं अपना वेतन बढ़ाने का फैसला लें। माकपा सांसदों के वेतन पर फैसला लेने वाली संसदीय समिति से हट गई है। हम इससे संबंधित फैसले में शामिल नहीं हैं।"

ज्ञात हो कि सांसदों को फिलहाल 16,000 रुपये का वेतन मिलता है। संसदीय मामलों के मंत्रालय का सुझाव है कि इसे बढ़ाकर 50,000 रुपये महीना किया जाए। जबकि संसदीय समिति ने इसे 80,001 रुपये करने की सिफारिश की है। समिति का कहना है कि सांसदों का वेतन कैबिनेट सचिव से एक रुपये ज्यादा होना चाहिए।

सांसदों पर हालांकि बड़ी रकम भत्तों के रूप में खर्च होती है। सत्र में शामिल होने या संसदीय समिति की बैठक में शामिल होने के लिए सांसदों को 1,000 रुपये प्रतिदिन का भत्ता मिलता है।

इसके अलावा सांसदों को अपने निर्वाचन क्षेत्र के दौरे के लिए 20,000 रुपये महीने और कार्यालयी खर्च के लिए 20,000 रुपये महीने का भत्ता मिलता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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